सुप्रीम कोर्ट का सुझाव: बिजली बिल से जोड़े जाएं ट्रैफिक के पेंडिंग चालान

Kittu Kumari28 September 20263 min read7 viewsNational
सुप्रीम कोर्ट का सुझाव: बिजली बिल से जोड़े जाएं ट्रैफिक के पेंडिंग चालान

सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा सुझाव दिया है। 28 सितंबर 2026 को देश की सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे अनभुगतान वाले इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक जुर्माने को बिजली के बिलों के साथ जोड़ने पर विचार करें। इस प्रस्ताव के पीछे मुख्य कारण यह है कि देश भर में लगभग 20,000 करोड़ रुपये के ट्रैफिक जुर्माने का भुगतान अभी बाकी है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से ट्रैफिक जुर्माना वसूलने के लिए बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव दिया।
  • देशभर में कुल 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान जारी हुए हैं, जिसमें से केवल 25,000 करोड़ रुपये ही वसूल हुए हैं।
  • यह एक मौखिक सुझाव है, न कि तुरंत देश भर में लागू करने का कोई आधिकारिक और बाध्यकारी न्यायिक आदेश।
  • मौजूदा कानूनी आधार मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 136A और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167A पर आधारित है।

सुनवाई और ई-चालान की स्थिति

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एक लंबे समय से चल रही जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक प्रवर्तन की स्थिति की समीक्षा की। Bar and Bench, CNBC-TV18, The Week, Moneycontrol और The Siasat Daily की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत को बताया गया कि राज्यों ने 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान जारी किए हैं, लेकिन इनमें से केवल 25,000 करोड़ रुपये ही सफलतापूर्वक एकत्र हो पाए हैं। जस्टिस पारदीवाला ने टिप्पणी की कि केवल भारी संख्या में टिकट जारी करने का मतलब वसूली नहीं होता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को बिजली बिलों में ट्रैफिक जुर्माना जोड़ देना चाहिए, क्योंकि लोग बिजली काटने से बचने के लिए भुगतान करेंगे। बेंच ने स्पष्ट किया कि यह तत्काल राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन के लिए कोई हस्ताक्षर किया हुआ आदेश नहीं बल्कि मौखिक सुझाव था।

जुर्माना वसूली के अन्य तरीके और कानूनी प्रक्रिया

बेंच ने कई मौजूदा प्रवर्तन तंत्रों पर भी चर्चा की जिनका उपयोग राज्य बकाया राशि वसूलने के लिए कर सकते हैं। इन उपायों में वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्र और फिटनेस प्रमाण पत्र के नवीनीकरण को रोकना, तथा स्वामित्व हस्तांतरण को प्रतिबंधित करना शामिल है। अधिकारी राष्ट्रीय पोर्टल पर वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने और ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने पर भी विचार कर रहे हैं। अनपायड चालान वाले वाहनों की अचानक सड़क पर जांच और उन्हें जब्त करने की संभावना को अतिरिक्त वसूली रणनीतियों के रूप में उजागर किया गया। इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन का वर्तमान कानूनी आधार मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 136A और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167A पर निर्भर करता है। चल रहा यह मामला एस. राजasekaran बनाम भारत संघ है, जो कोयंबटूर के ऑर्थोपेडिक सर्जन एस. राजasekaran द्वारा 2012 में दायर एक याचिका से शुरू हुआ था। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल इस मामले में अदालत की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी हैं।

व्यावहारिक प्रभाव और वाहन मालिकों के लिए निर्देश

अदालत द्वारा जुर्माने को यूटिलिटी बिलों में जोड़ने के सुझाव के बावजूद, वर्तमान में यह प्रथा किसी भी राज्य में डिफ़ॉल्ट कानून नहीं है। बिजली वितरण कंपनियां अलग-अलग कानूनों और आपूर्ति कोड के तहत काम करती हैं। ट्रैफिक जुर्माने को बिजली बिलिंग से जोड़ने के किसी भी कदम के लिए परिवहन विभागों और स्थानीय डिस्कॉम के बीच महत्वपूर्ण प्रशासनिक और कानूनी समन्वय की आवश्यकता होगी। बिजली जैसी आवश्यक सेवाओं से unpaid fines को जोड़ना उचित प्रक्रिया और आनुपातिकता पर जटिल सवाल खड़ा करता है। ऐसे उपायों के आलोचक इस बात की ओर इशारा कर सकते हैं कि वाहन का पंजीकृत मालिक हमेशा वह व्यक्ति नहीं होता जिसने विशिष्ट यातायात उल्लंघन किया हो। कई सदस्यों या किरायेदारों वाले परिवारों को महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है यदि ट्रैफिक बकाया किसी साझा यूटिलिटी खाते से जोड़ दिया जाए। न्यायपालिका के लिए मुख्य चिंता का विषय यह है कि यदि ई-चालान को बिना परिणाम के नजरअंदाज किया गया तो सड़क सुरक्षा का डर समाप्त हो जाएगा। अदालत ने पहले के सड़क सुरक्षा निर्देशों के कार्यान्वयन को ट्रैक करने के लिए एमिकस क्यूरी से एक स्टेटस चार्ट मांगा है। फिलहाल, वाहन मालिकों को मौजूदा ई-चालान को वैध वित्तीय देनदारियों के रूप में मानना जारी रखना चाहिए।

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