सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव: बिजली बिल से जुड़ सकते हैं ट्रैफिक चालान, भारी पेंडेंसी पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और बकाया चालान की वसूली को लेकर एक बड़ा सुझाव दिया है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने 28 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रैफिक चालान के नियमों का पालन कराने के लिए नए और कड़े कदम उठाने की जरूरत है। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि जिन लोगों ने अपने ट्रैफिक चालान का भुगतान नहीं किया है, उनके बकाये को बिजली बिल के साथ जोड़ा जा सकता है ताकि रिकवरी में तेजी आ सके। इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सड़क सुरक्षा से जुड़ी 2012 की एक जनहित याचिका पर विचार किया।
देशभर में कुल 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान जारी किए गए हैं, जिनमें से लगभग 20,000 करोड़ रुपये का बकाया अभी भी पेंडिंग है। दिल्ली की स्थिति इस मामले में काफी गंभीर बनी हुई है, जहां ट्रैफिक जुर्माने की पेंडेंसी दर 73 प्रतिशत तक पहुंच गई है। आंकड़ों के मुताबिक, कैमरे से भेजे गए नोटिसों की पेंडेंसी दर 75.8 प्रतिशत है, जबकि मौके पर काटे जाने वाले चालानों की पेंडेंसी दर 66.4 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वाहन रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण रोकने, ड्राइविंग लाइसेंस और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) ब्लॉक करने जैसे कई अन्य दंडात्मक उपायों की भी सिफारिश की है।
दिल्ली सरकार ने मई 2026 से एक सख्त डिजिटल व्यवस्था लागू की है जिसके तहत चालान को चुनौती देने से पहले 50 प्रतिशत जुर्माना जमा करना अनिवार्य है। उल्लंघन करने वालों को नोटिस का निपटान करने या उसे चुनौती देने के लिए 45 दिन का समय मिलता है और इस अवधि में कार्रवाई न होने पर चालान स्वतः स्वीकार मान लिया जाता है। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अपने सिस्टम को भारत बिल पेमेंट सिस्टम से जोड़ा है और डिजिटल भुगतान के लिए व्हाट्सएप तथा यूपीआई प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।