सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा डीएम मेधा रूपम पर लगे 5 लाख रुपये के जुर्माने पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमें गौतम बुद्ध नगर की जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) मेधा रूपम पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। यह जुर्माना छात्र-कार्यकर्ता आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत का आदेश जारी करने को लेकर लगाया गया था। न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति नोंग्मेकपम कोटेश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर के लिए तय की है और प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। मूल खबर ANI के माध्यम से सामने आई है।
कोर्ट की सुनवाई और दलीलें
अदालत की कार्यवाही के दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से सवाल किया कि क्या डीएम को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है जब हिरासत का प्रस्ताव प्रशासन के कई स्तरों से गुजरा था। उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि डीएम पांच चरणों की प्रक्रिया का केवल एक हिस्सा थीं और उन्होंने सभी सुरक्षा उपायों का पालन करने के बाद अपनी राय बनाई थी। उन्होंने डीएम के वेतन से 5 लाख रुपये वसूलने के निर्देश और प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की मांग की।
प्रतिवादी पक्ष का पक्ष
कार्यकर्ता का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने हाई कोर्ट के फैसले का समर्थन किया और तर्क दिया कि हिरासत के आधार यह स्थापित नहीं करते हैं कि आकृति ने सार्वजनिक व्यवस्था को कैसे बाधित किया था। उन्होंने अधिकारियों द्वारा भरोसा की गई सामग्री पर सवाल उठाया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गुण-दोेष के आधार पर सुनवाई होने तक हाई कोर्ट के फैसले के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।