गुरुग्राम की लाइसेंस कॉलोनी में सीलिंग पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे, 29 प्रॉपर्टी मालिकों को मिली राहत

गुरुग्राम के पॉश इलाकों में चल रहे सीलिंग अभियान के बीच वहां के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए शहर की लाइसेंस प्राप्त प्लॉटेड कॉलोनियों में सीलिंग ड्राइव पर दो हफ्ते की रोक लगा दी है। इस फैसले से DLF फेज I, II, III और सुशांत लोक-1 जैसे इलाकों के कम से कम 29 प्रॉपर्टी मालिकों ने राहत की सांस ली है।
यह पूरा मामला 'गौरव कोहली बनाम हरियाणा राज्य' शीर्षक वाली एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) से जुड़ा है। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की, जिसमें याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील आदित्य सिंह पेश हुए। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 के लिए तय की है।
अधिकार क्षेत्र की लड़ाई: DTCP बनाम MCG
इस कानूनी विवाद की जड़ में नगर निगम गुरुग्राम (MCG) और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग निदेशालय (DTCP) के बीच अधिकार क्षेत्र की जंग है। विवाद इस बात पर है कि 2008 की सरकारी अधिसूचना के बाद, जो इलाके MCG की सीमा में आ गए हैं, वहां प्रॉपर्टीज को सील करने और नोटिस जारी करने का अधिकार किसके पास है।
प्रॉपर्टी मालिकों का तर्क है कि हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 को हरियाणा विकास और शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम, 1975 के ऊपर प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हालांकि, इससे पहले 7 सितंबर को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने DTCP के अधिकारों को बरकरार रखा था और कहा था कि नगर निगम में शामिल होने से विभाग की शक्तियां खत्म नहीं होतीं।
बता दें कि जिला नगर योजनाकार (प्रवर्तन) अमित मधोलिया के नेतृत्व में चलाए गए अभियान में अब तक DLF फेज 3, 4, सुशांत लोक-1 और साउथ सिटी-1 जैसे इलाकों में 160 से अधिक घरों को व्यावसायिक गतिविधियों के नाम पर सील किया जा चुका है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से आगे की सीलिंग तो रुक गई है, लेकिन पहले से सील हो चुके घरों पर इसका क्या असर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ जहां कुछ कॉलोनियों को राहत मिली है, वहीं DTCP का अभियान अन्य जगहों पर जारी है। 13 अक्टूबर को ही साउथ सिटी-2 में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया और वाटिका इंडिया नेक्स्ट में एक अवैध इमारत को सील किया गया।