कैंसर की दवाओं की कीमतों में भारी अंतर: सुप्रीम कोर्ट ने इसे 'दिनदहाड़े लूट' बताया, मीडिया रिपोर्ट में 10 गुना ज्यादा दाम로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로

Kittu Kumari24 September 20263 min read0 viewsNational
कैंसर की दवाओं की कीमतों में भारी अंतर: सुप्रीम कोर्ट ने इसे 'दिनदहाड़े लूट' बताया, मीडिया रिपोर्ट में 10 गुना ज्यादा दाम로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로로

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को कैंसर की आवश्यक दवाओं की अधिकतम रिटेल प्राइस (MRP) और रिटेलर के लिए कीमत (PTR) के बीच के भारी अंतर को लेकर कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस अंतर को 'दिनदहाड़े लूट' और 'पूर्ण विनाश और नरसंहार' बताया। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि इतनी बड़ी कीमतों में अंतर होने के बावजूद संबंधित अधिकारी मौन रहे। कोर्ट ने प्रतिवादियों के तर्क सुनने के लिए अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को तय की है।

मुख्य बिंदु:

  • सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर दवाओं की कीमतों में भारी अंतर को 'दिनदहाड़े लूट' और 'नरसंहार' कहा।
  • आजतक की रिपोर्ट में दवाओं को MRP own 10 गुना तक ज्यादा दाम पर बेचने का खुलासा हुआ।
  • दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन ने कहा कि यह समस्या लगभग सभी दवाओं की कीमतों में अंतर से जुड़ी है।
  • राजीव गांधी कैंसर संस्थान और रिसर्च सेंटर ने बताया कि DPCO 2013 का तंत्र लगभग 80% बाजार की दवाओं को कवर नहीं करता है।
  • सरकार ने 131 कैंसर दवाओं की अधिकतम कीमतें तय की थीं और 17 दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटा दी थी।
  • कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण कुछ कैंसर दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की मंजूरी दी गई थी।

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दवाओं की कीमतों में भारी अंतर और मीडिया रिपोर्ट

कोर्ट की टिप्पणियों के बाद, बुधवार, 23 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर एक संसदीय समिति ने कैंसर के इलाज को सस्ता बनाने और दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण करने के उपाय ढूंढने के लिए बैठक की। गुरुवार, 24 सितंबर 24, 2026 को Aajtak की एक 'रियलिटी चेक' रिपोर्ट में दिल्ली के सबसे बड़े दवा बाजार से यह खुलासा हुआ कि जीवन रक्षक और कैंसर की दवाओं को उनके MRP से 10 गुना तक अधिक कीमतों पर बेचा जा रहा था। उदाहरण के लिए, 2,700 रुपये की MRP वाली दवा 27,000 रुपये में बेची जा रही थी। दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यह समस्या पुरानी है और केवल कैंसर की दवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग सभी दवाओं की कीमतों में 핵심핵심핵심핵심핵심핵심핵심 के बीच अंतर है।

नियामक संस्थाओं और सरकारी प्रयासों के लिए सवाल

भारत में दवाओं की प्राइजिंग रेगुलेशन का काम नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइजिंग अथॉरिटी (NPPA) की यह जिम्मेदारी है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि NPPA के पास PTR और स्टॉकिस्टों की कीमतों का डेटा है, लेकिन यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। राजीव गांधी Cancer Institute & Research Centre ने उल्लेख किया कि ड्रग प्राइज कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) 2013 का तंत्र लगभग 80% बाजार की दवाओं को लगागु नहीं होता है, जिससे वास्तविक लागत और MRP के बीच 0% से 80% तक का अंतर आता है।

सरकारी कदम और मरीजों की स्थिति

मार्च 2026 में, सरकार ने 141 कैंसर दवाओं की प्रभावी अधिकतम कीमतें तय की थीं। इसके अलावा, 2026-27 के केंद्रीय बजट में, 17 आवश्यक और महंगी कैंसर दवाओं पर बुनियादी कस्टम ड्यूटी हटा दी गई थी ताकि इलाज का खर्च कम हो सके। हालांकि, जून 2026 में, कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण केंद्र सरकार ने प्लेटिनम-आधारित कैंसर दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की मंजूरी दी, जिससे सिसप्लेटिन और कार्बोप्लेटिन जैसी दवाओं की आवश्यकता और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई। दवाओं की कीमतों में इस अत्यधिक वृद्धि के कारण मरीजों को अपना घर और गहने बेचने पड़ रहे हैं, जिससे सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और प्रतिपूर्ति (reimbursements) पर भी असर पड़ रहा है।

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