सुप्रीम कोर्ट का बड़ा प्रस्ताव: बिजली बिल से जुड़ सकते हैं ट्रैफिक चालान

ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक नया और सख्त सुझाव दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन लोगों ने अपने ट्रैफिक चालान का भुगतान नहीं किया है, उनके उन बकायों को सीधे बिजली बिल के साथ जोड़ा जा सकता है। 28 सितंबर 2026 को सड़क सुरक्षा से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने यह बात कही। अदालत ने साफ किया कि पुराने तरीके काम नहीं आ रहे हैं, इसलिए बकाएदारों के बिजली कनेक्शन काटने जैसे सख्त कदम उठाने पर विचार किया जाना चाहिए।
देशभर में पेंडिंग ट्रैफिक चालान का आंकड़ा 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत में कुल 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान जारी किए गए थे, जिसमें से 20,000 करोड़ रुपये का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। इसके अलावा दिल्ली में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं, जहां ट्रैफिक जुर्माने का पेंडेंसी रेट 73 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। दिल्ली में कैमरे से कटने वाले नोटिसों का पेंडेंसी रेट 75.8 प्रतिशत और मौके पर काटे जाने वाले चालानों का रेट 66.4 प्रतिशत है। इस बारे में अधिक जानकारी PTI News पर उपलब्ध है।
सख्त सजा और डिजिटल व्यवस्था
चालान न भरने वालों के खिलाफ कई अन्य कड़े कदम उठाने की भी सिफारिश की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने वाहन पंजीकरण का नवीनीकरण रोकने, ड्राइविंग लाइसेंस और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) रद्द करने तथा परिवहन पोर्टलों पर वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने जैसे उपाय सुझाए हैं। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने मई 2026 से एक सख्त डिजिटल व्यवस्था लागू कर दी है।
नियमों का पालन आसान बनाने के लिए डिजिटल भुगतान के विकल्प भी दिए गए हैं। अदालत में किसी चालान को चुनौती देने से पहले उल्लंघन करने वालों को जुर्माने का 50 प्रतिशत हिस्सा जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। चालान का निपटारा करने या चुनौती देने के लिए 45 दिन का समय मिलता है और तय समय में कार्रवाई न होने पर चालान स्वतः स्वीकार कर लिया जाता है। लोगों की सुविधा के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अपने सिस्टम को भारत बिल पेमेंट सिस्टम से जोड़ दिया है और व्हाट्सएप नोटिफिकेशन तथा यूपीआई प्लेटफॉर्म जैसे भीम यूपीआई के जरिए डिजिटल भुगतान की सुविधा दी है।