प्रदर्शनों पर सख्ती: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगे BNSS धारा 163 के आदेश

Kittu Kumari15 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
प्रदर्शनों पर सख्ती: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगे BNSS धारा 163 के आदेश

देश की सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली में पिछले दो हफ्तों से जारी प्रदर्शनों और उन पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत जारी किए गए उन सभी प्रतिबंधात्मक आदेशों को अदालत के सामने पेश करे, जिनके जरिए सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाई गई थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि नागरिक स्वतंत्रता सर्वोपरि है। कोर्ट ने आदेश दिया कि सार्वजनिक आवाजाही, इंटरनेट सेवाओं और मेट्रो के संचालन में अनावश्यक बाधाएं नहीं डाली जानी चाहिए। साथ ही, अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह प्रदर्शनों से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखे ताकि सच्चाई सामने आ सके।

राहुल गांधी के मार्च पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

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सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की ओर होने वाले मार्च पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि "न्यायपालिका को कोई डराने की कोशिश नहीं कर सकता" और इस संबंध में राहुल गांधी को नोटिस जारी किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को एक अन्य याचिका पर भी नोटिस भेजा है, जिसमें जंतर मंतर को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की मांग की गई है। वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी कि इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं और उन्होंने पत्रकारों के उपकरण जब्त किए जाने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।

इस बीच, कोर्ट ने एक महिला पत्रकार को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है, जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन पर एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था।

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने एक हलफनामे में विभाग के कदमों का बचाव करते हुए इन्हें 'निवारक उपाय' बताया। उन्होंने तर्क दिया कि 10 अक्टूबर को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए खुफिया इनपुट के आधार पर ये कदम उठाए गए थे।

यह पूरी कानूनी लड़ाई चुनाव आयोग द्वारा की गई मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा (SIR) और चुनाव आयुक्तों को मिली छूट से जुड़ी याचिकाओं के बीच छिड़ी है, जिसमें राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने पारदर्शिता की मांग की है।

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