त्योहारों के समय दिल्ली में प्रदर्शनों से व्यापार प्रभावित, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को भेजा नोटिस
त्योहारों के समय सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शनों से व्यापार प्रभावित होने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है।

त्योहारों के सीजन में जब दिल्ली के बाजारों में रौनक होनी चाहिए, तब सेंट्रल दिल्ली में हो रहे लगातार विरोध प्रदर्शनों ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई किरना कमेटी दिल्ली और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट्स एसोसिएशन जैसे व्यापारिक संगठनों द्वारा दायर याचिकाओं के बाद की गई है।
व्यापारियों का आरोप है कि कनॉट प्लेस और रामलीला मैदान जैसे इलाकों में लगातार हो रहे प्रदर्शनों की वजह से व्यावसायिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच मुश्किल हो गई है, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। 3 नवंबर 2026 को जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
विरोध का अधिकार बनाम रोजी-रोटी का हक
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही। बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति या समूह के पास सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चित काल तक कब्जा जमाकर प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने जोर दिया कि विरोध जताने के अधिकार और अन्य नागरिकों के व्यापार करने व अपनी रोजी-रोटी कमाने के अधिकार के बीच एक संतुलन होना जरूरी है।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने टिप्पणी की कि सभी प्रदर्शनों के लिए एक निश्चित समय सीमा और अवधि तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को प्रदर्शन की अनुमति देते समय या उसे खारिज करते समय स्पष्ट और तर्कसंगत कारण बताने चाहिए।
यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों, सामूहिक हिरासत, मेट्रो सेवाओं और इंटरनेट पर प्रतिबंध, और जंतर मंतर को विरोध स्थल के रूप में डी-नोटिफाई करने जैसे अन्य संबंधित मामलों के साथ जोड़कर देखा गया। कोर्ट ने अब याचिकाकर्ता संगठनों को निर्देश दिया है कि वे उन राजनीतिक दलों और समूहों को भी इस मामले में शामिल करें, जो इन प्रदर्शनों का आयोजन कर रहे हैं, क्योंकि उनके बिना विवाद का समाधान संभव नहीं है।