चुनाव आयुक्तों को मिली छूट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों को मिली पूर्ण छूट की चुनौती पर केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

Kittu Kumari5 November 20261 min read0 viewsNational
चुनाव आयुक्तों को मिली छूट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और चुनाव आयोग से मांगा जवाब

चुनाव आयुक्तों को दी गई पूर्ण छूट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अब कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस छूट को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों को मिलने वाली विशेष छूटों की संवैधानिकता से जुड़ा है।

इस कानूनी हलचल के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को दी गई इन छूटों को असंवैधानिक घोषित करेगा। दास ने यहाँ तक कह दिया कि यदि ये छूट असंवैधानिक पाई जाती हैं, तो संबंधित अधिकारियों को राजद्रोह के आरोपों में जेल जाना पड़ सकता है।

चुनावी निष्पक्षता और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप

मामला सिर्फ कानूनी छूट तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सौरव दास ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में 'सिस्टमैटिक इंटीग्रिटी रिसर्च' (SIR) में धोखाधड़ी के नए सबूत सामने आए हैं। उनके अनुसार, इन खुलासों ने हाल के सभी चुनावों की ईमानदारी और निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।

वहीं, दूसरी ओर दिल्ली के मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। यहाँ मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 1,021 आवेदन जमा किए गए थे। हैरानी की बात यह है कि इनमें से लगभग 77 प्रतिशत मामलों में भाजपा के बूथ लेवल एजेंटों (BLAs) ने इन आवेदनों (फॉर्म-7) को दाखिल करने में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।

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