वकीलों की हिरासत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन, परिसर में पढ़ी संविधान की प्रस्तावना

देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट के परिसर में मंगलवार को एक अलग नजारा देखने को मिला। यहाँ बड़ी संख्या में वकीलों ने अपने सहयोगियों की कथित तौर पर पुलिस द्वारा की गई पिटाई और हिरासत के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह पूरा मामला चुनाव आयोग (EC) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों से जुड़ा है, जहाँ कुछ वकीलों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।
विरोध प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने अपनी एकजुटता दिखाने के लिए संविधान की प्रस्तावना (Preamble) पढ़ी। उनका कहना था कि यह विरोध केवल अपने साथियों के लिए नहीं, बल्कि उन सभी नागरिकों के लिए है जिन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के दौरान पुलिसिया कार्रवाई का सामना करना पड़ा। वकीलों ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे छीना नहीं जा सकता।
संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का लिया संकल्प
प्रदर्शन में शामिल एक वकील ने कहा, "हम यहाँ अपने उन साथियों और देश के नागरिकों के साथ खड़े हैं जिन्हें शांतिपूर्ण विरोध के कारण प्रताड़ित किया गया। एक वकील का प्राथमिक कर्तव्य संविधान की रक्षा करना और उसे बनाए रखना है, और आज हमने फिर से उसी संकल्प को दोहराया है।"
वकीलों ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि उनके सहयोगियों को उनके चैंबरों और सुप्रीम कोर्ट के पास से हिरासत में लिया गया, जो पूरी तरह से अवैध और अनावश्यक था। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा हम सबको एक सूत्र में बांधती है।
इस दौरान वकीलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें एकत्र होने की अनुमति दी और इस मामले में हस्तक्षेप किया। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि यह कोई राजनीतिक आयोजन नहीं था, बल्कि संवैधानिक अधिकारों और संस्थागत अखंडता को बचाने की एक कोशिश थी।
गौरतलब है कि यह विरोध प्रदर्शन उस समय हुआ जब राहुल गांधी के नेतृत्व में 'INDIA' गठबंधन के नेताओं और समर्थकों ने बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था। इसके साथ ही 11 विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है।