जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी बनाएगा सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court ने 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच के लिए एक हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) बनाने की घोषणा की है। इस कमेटी को बनाने का औपचारिक आदेश 19 अगस्त 2026 को जारी होने की उम्मीद है, जो अदालत द्वारा 18 अगस्त 2026 को की गई शुरुआती घोषणा के बाद आया है।
- जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए बनेगी हाई-पावर्ड कमेटी।
- कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस, CBI के पूर्व डायरेक्टर और DGP शामिल होंगे।
- दिल्ली पुलिस को CCTV फुटेज और ड्रोन रिकॉर्डिंग जैसे सभी सबूत कमेटी को सौंपने का निर्देश।
कमेटी का गठन और सबूत
यह कमेटी पुलिस बर्बरता, यौन उत्पीड़न और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लक्षित कार्रवाई के आरोपों की जांच करेगी। कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज, एक हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस, एक पूर्व CBI डायरेक्टर और एक पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-वर्न कैमरा डेटा, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड और PCR लॉग सहित सभी सबूत कमेटी को सौंपे। इसके अलावा, कमेटी प्रदर्शनों के दौरान बल के उचित इस्तेमाल पर दिशानिर्देश भी तैयार करेगी।
FIR और पुलिस पक्ष
अालत ने संकेत दिया है कि गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले नहीं होने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR को रद्द किया जा सकता है, वहीं दिल्ली पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े 2,873 लोगों की जांच जारी रखेगी। सरकार और दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एक हलफनामे में कहा कि 'संसद चलो मार्च' अवैध था क्योंकि इसके लिए कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के दौरान 200 पुलिसकर्मी घायल हुए थे, और तर्क दिया कि प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड तोड़ने के बाद ही बल का प्रयोग किया गया था।
चीफ जस्टिस के निर्देश और राजनीतिक प्रतिक्रिया
चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जो बेंच की अध्यक्षता कर रहे हैं, ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के मौलिक अधिकार पर जोर दिया और छात्रों के भविष्य पर आपराधिक रिकॉर्ड के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई। प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अनुरोध किया है कि कमेटी पूरी तरह से स्वतंत्रता सुनिश्चित करे और इसमें इसके सदस्यों का प्रतिनिधित्व भी शामिल हो। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी की सदस्यता के संबंध में और सुझाव देने के लिए स्टेकहोल्डर्स और याचिकाकर्ताओं को आमंत्रित किया है।