दिल्ली बस गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, 2012 के निर्भया कांड जैसी घटना

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन ने 28 सितंबर 2026 को 4 अगस्त 2026 को चलती स्लीपर बस में 17 वर्षीय लड़की के साथ हुए गैंगरेप मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने इस घटना को कानून व्यवस्था की एक व्यवस्थित विफलता बताया और 2012 के निर्भया मामले से इसकी तुलना करते हुए दिल्ली प्रशासन, पुलिस और संबंधित अधिकारियों को सार्वजनिक सुरक्षा में चूक की जवाबदेही तय करने के लिए नोटिस जारी किए हैं। यह घटना ग्रेटर नोएडा से पुरानी दिल्ली के कश्मीरी गेट तक लगभग 47 किलोमीटर तक बिना रोके चलाई गई बस के भीतर हुई थी।
पुलिस कार्रवाई और फॉरेंसिक सबूत
पुलिस ने अपराध के चार घंटे के भीतर ही कानपुर के रहने वाले 39 वर्षीय बस ड्राइवर कुलदीप और 26 वर्षीय कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार कर लिया था। जांचकर्ता एक मजबूत चार्जशीट को अंतिम रूप दे रहे हैं, जिसमें वर्तमान में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) में विश्लेषण के अधीन बाल और वीर्य के नमूनों सहित महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्य शामिल हैं। इसके अलावा, अधिकारियों ने वाहन से पीड़िता और आरोपियों के फिंगरप्रिंट बरामद किए हैं, संदिग्धों के कपड़े जब्त किए हैं और घटना को फिर से तैयार करने के लिए सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित किए हैं।
नियामक विफलताएं और बस का रिकॉर्ड
जांच में प्राइवेट बस ऑपरेटर द्वारा महत्वपूर्ण नियामक विफलताओं का खुलासा हुआ है, जिससे पता चलता है कि न तो ड्राइवर और न ही कंडक्टर का अनिवार्य पुलिस सत्यापन किया गया था। इसके अलावा, आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि वाहन पर स्पीड लिमिट डिवाइस, परमिट शर्तों और आवश्यक रेट्रोreflective टेप की अनुपस्थिति से जुड़े विभिन्न उल्लंघनों के लिए 11 पेंडिंग ट्रैफिक चालान थे। कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ने के साथ ही अधिकारी बस ऑपरेटरों से उनकी भर्ती प्रथाओं के बारे में पूछताछ कर रहे हैं।