दिल्ली में पटाखों की खुली बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के बाजारों में पटाखों की अवैध बिक्री पर जताई चिंता, केंद्र और दिल्ली सरकार को जांच के आदेश दिए।

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बीच पटाखों की अवैध बिक्री ने सुप्रीम कोर्ट को नाराज कर दिया है। कोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि प्रतिबंधात्मक आदेश जारी होने के महज एक दिन बाद ही दिल्ली के बाजारों में पटाखों की खुलेआम बिक्री हो रही है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्न बी. वरले की बेंच ने एक अखबार की रिपोर्ट और उसमें मौजूद तस्वीरों का संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को इस मामले की तुरंत जांच करने का निर्देश दिया है।
ग्रीन पटाखों के लिए तय हैं कड़े नियम
अदालत ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान निर्देशों के तहत केवल प्रमाणित 'ग्रीन पटाखों' की बिक्री की अनुमति है, वह भी केवल 4 नवंबर से 6 नवंबर 2026 के बीच। इन पटाखों को चलाने के लिए भी समय सीमा तय की गई है; इन्हें केवल 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे के बीच ही चलाया जा सकेगा। 9 नवंबर से पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध फिर से लागू हो जाएगा।
कोर्ट ने नियमों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अब केवल वही पटाखे बेचे जा सकते हैं जिन्हें CSIR-NEERI और PESO द्वारा प्रमाणित किया गया हो। पहचान के लिए हर बॉक्स पर एक नॉन-ट्रांसफरेबल QR कोड होना अनिवार्य है, जिससे उसकी असलियत जांची जा सके। बेरियम युक्त पटाखों और 'लड़ियों' की बिक्री पर पूरी तरह रोक है।
इसके अलावा, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, ओल्ड एज होम और साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर पाबंदी लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और हरियाणा की पुलिस को भी अलर्ट रहने को कहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे NCR में आने वाले वाहनों की जांच करें, QR कोड का सत्यापन करें और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम व ध्वनि प्रदूषण नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।