दिल्ली-NCR में पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख, पूर्ण प्रतिबंध के बजाय संतुलन पर जोर

दिल्ली-NCR में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ किया कि वह पटाखों पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने के पक्ष में नहीं है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और लोगों की धार्मिक भावनाओं के बीच एक संतुलन बनाना जरूरी है।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने एक व्यावहारिक चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर पटाखों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई, तो इसका उल्टा असर हो सकता है। ऐसी स्थिति में लोग नियमों को नजरअंदाज कर सकते हैं और दिन के उजाले में ही पटाखे चलाने लग सकते हैं। इसी वजह से कोर्ट एक ऐसा ढांचा तैयार करने पर विचार कर रहा है जो व्यावहारिक हो। कोर्ट ने संकेत दिया है कि प्रदूषण को कम करने के लिए पटाखों के इस्तेमाल के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जा सकती है।
प्रदूषण नियंत्रण और स्वास्थ्य पर ध्यान
अदालत ने आम जनता से अपील की है कि वे पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को अपनाएं और पटाखों से निकलने वाले जहरीले धुएं से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति जागरूक रहें। इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए कोर्ट ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख साझा करने का निर्देश दिया गया है।
- बेरियम आधारित पटाखों को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा।
- फिलहाल दिल्ली-NCR में पटाखों को लेकर जो पुराने आदेश लागू हैं, वे प्रभावी रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य उद्देश्य वायु गुणवत्ता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है ताकि लोग खुद जिम्मेदारी समझें। इस संवेदनशील मामले पर अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को तय की गई है, जिसमें कोर्ट आगे के दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।