वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म-6 के निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
दिल्ली में लाखों वोटरों के नाम हटने के बाद चुनाव आयोग के फॉर्म-6 निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद दोबारा पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 भरने के निर्देश पर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। 19 नवंबर को अदालत इस याचिका पर विचार करेगी। इस पूरे मामले को लेकर जस्टिस सूर्य कांत की बेंच ने स्पष्ट किया है कि मामला अभी विचाराधीन है, इसलिए नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
यह विवाद दिल्ली में हुए 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के बाद शुरू हुआ, जिसमें ड्राफ्ट लिस्ट से करीब 47 लाख वोटरों के नाम हटा दिए गए। याचिकाकर्ताओं, अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने उन्हें चुनाव आयोग द्वारा दी गई स्पष्टीकरण को रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह संकेत भी दिए हैं कि यदि जरूरी समझा गया, तो पंजीकरण के लिए समय सीमा बढ़ाई जा सकती है।
क्या है पूरा विवाद और कोर्ट की आपत्ति?
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे प्रशांत भूषण ने दलील दी कि चुनाव आयोग का यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट की 28 अक्टूबर की टिप्पणियों के विपरीत है। कोर्ट ने पहले सवाल किया था कि जो लोग पहले से पंजीकृत थे, उन्हें अब फॉर्म-6 भरने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? आमतौर पर फॉर्म-6 नए आवेदकों के लिए होता है, जबकि पुराने वोटरों के लिए फॉर्म-8 या सुधार प्रक्रिया का उपयोग होना चाहिए था।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने 3 नवंबर को राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को सूचित किया था कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, वे दोबारा नामांकन के लिए फॉर्म-6 का उपयोग कर सकते हैं। आयोग ने यह भी भरोसा दिलाया कि ऐसे आवेदकों पर 'गलत घोषणा' करने का कोई आरोप नहीं लगाया जाएगा।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह प्रभावित वोटरों तक पहुँचने के लिए एक सरल और सक्रिय तंत्र विकसित करे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में दोबारा शामिल किए जा सकें।