वोटर लिस्ट विवाद: चुनाव आयोग के 'फॉर्म 6' पर 19 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
दिल्ली वोटर लिस्ट से नाम हटने और फॉर्म 6 भरने के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट 19 नवंबर को सुनवाई करेगा। जानें क्या है पूरा मामला।

दिल्ली की वोटर लिस्ट से लाखों नाम गायब होने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह ऐलान किया कि वह चुनाव आयोग (ECI) द्वारा 'फॉर्म 6' को लेकर जारी किए गए स्पष्टीकरण से जुड़ी याचिका पर 19 नवंबर को सुनवाई करेगा। यह पूरा विवाद दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान शुरू हुआ, जिसमें कथित तौर पर करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए।
अदालत में इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला अभी विचाराधीन है, इसलिए मतदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी को निर्देश दिया है कि वे चुनाव आयोग द्वारा 3 नवंबर को जारी स्पष्टीकरण को रिकॉर्ड में शामिल करते हुए उचित आवेदन दाखिल करें।
क्या है फॉर्म 6 और विवाद की असली वजह?
दरअसल, चुनाव आयोग ने 3 नवंबर को स्पष्ट किया था कि जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हट गए हैं, वे अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए 'फॉर्म 6' भर सकते हैं। आयोग ने भरोसा दिलाया कि केवल इस आधार पर कि व्यक्ति पहले पंजीकृत था, फॉर्म 6 भरने को गलत घोषणा नहीं माना जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि जानकारी सही है और व्यक्ति कहीं और पंजीकृत नहीं है, तो चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (EROs) द्वारा कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वकील प्रशांत भूषण ने इस दलील को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि यह रुख सुप्रीम कोर्ट की पिछली टिप्पणियों के विपरीत है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जो लोग पहले से मतदाता थे, उन्हें नए आवेदकों की तरह 'फॉर्म 6' भरने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उनकी मांग है कि इसके बजाय 'फॉर्म 8' या किसी अन्य विकल्प का उपयोग किया जाए, क्योंकि फॉर्म 6 में दी गई घोषणा के कारण मतदाताओं पर गलत जानकारी देने के कानूनी आरोप लगने का खतरा हो सकता है।
फिलहाल, दावों और आपत्तियों को दर्ज कराने की अंतिम तिथि 25 नवंबर तक बढ़ा दी गई है। मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया है कि यदि जरूरत पड़ी, तो अदालत चुनाव आयोग को मतदाता सूची संशोधन की समय सीमा और आगे बढ़ाने का निर्देश दे सकती है।