दिल्ली वोटर रजिस्ट्रेशन: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को प्रक्रिया सरल बनाने के निर्देश दिए
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाने और लाखों मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए चुनाव आयोग को फटकार लगाई।

देश की राजधानी में वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि वह दिल्ली वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाए ताकि आम नागरिकों को वोट डालने के अपने बुनियादी अधिकार से वंचित न होना पड़े। यह मामला तब गरमाया जब पता चला कि करीब 43 से 47.7 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल से हटा दिए गए या उनसे गलत फॉर्म भरने को कहा गया।
चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि पहले से रजिस्टर्ड मतदाताओं से 'फॉर्म 6' भरने को कहा जा रहा है, जबकि यह फॉर्म केवल नए मतदाताओं के लिए होता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पते में सुधार या ट्रांसफर के लिए 'फॉर्म 8' का इस्तेमाल किया जा सकता था। जस्टिस बागची ने जोर देते हुए कहा कि वोट देने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और समय सीमा पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि आयोग को केवल प्रशासनिक बोझ जनता पर डालने के बजाय खुद आगे बढ़कर मतदाताओं तक पहुंचना चाहिए। साथ ही, मतदाताओं को 'ट्रांसफर्ड' या 'अनुपस्थित' श्रेणी में डालने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए। कोर्ट का मानना है कि किसी व्यक्ति की अस्थायी अनुपस्थिति को स्थायी रूप से पता बदलना नहीं माना जाना चाहिए।
समय सीमा की बात करें तो, कोर्ट ने 30 अक्टूबर की डेडलाइन बढ़ाने का सुझाव दिया है, क्योंकि दिल्ली में फिलहाल कोई चुनाव तुरंत नहीं होने वाले हैं। चुनाव आयोग ने इस समय सीमा की समीक्षा करने की सहमति जताई है। यह याचिका पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी द्वारा दायर की गई थी, जिनकी पैरवी वकील प्रशांत भूषण ने की। अब सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दो हफ्ते के भीतर इन सभी चिंताओं और सुझावों पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।