दिल्ली में चल रही विशेष सघन संशोधन प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्तियों की पीठ ने 33 लाख से अधिक मतदाताओं को भेजे गए नोटिस पर चिंता जताई है। अदालत ने ईसीआई को तार्किक विसंगतियों के आधार स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए एएनआई समाचार पढ़ सकते हैं।
याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। आंकड़ों के अनुसार
लगभग 19.33 लाख मतदाताओं को तार्किक विसंगति और 13.79 लाख को बिना मैपिंग के श्रेणी में रखा गया है। इन विसंगतियों में मतदाता और माता-पिता के बीच 15 साल से कम उम्र का अंतर शामिल है। चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्री नायडू ने कहा कि प्रत्येक नोटिस में एक विशिष्ट कारण शामिल था और आश्वासन दिया कि बिना निष्पक्ष सुनवाई के किसी मतदाता को हटाया नहीं जाएगा।
आयोग ने सत्यापन प्रक्रिया को प्रबंधित करने के लिए
14,000 बूथ लेवल अधिकारियों और 1,200 चुनावी पंजीकरण अधिकारियों को तैनात किया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि ईसीआई मतदाताओं की सहायता के लिए सामान्य आपत्तियों के मानक जवाब प्रदान करे। वर्तमान सत्यापन अभ्यास 29 अक्टूबर को समाप्त होने वाला है और आयोग ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो विस्तार पर विचार किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की गई है।