दिल्ली विरोध प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई का दिया भरोसा

राजधानी दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों और उससे जुड़ी कानूनी याचिकाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आश्वासन दिया है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों से संबंधित सभी लंबित आवेदनों की न्यायिक समीक्षा की जाएगी और उन्हें जल्द ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
अदालत ने इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए कानूनी सलाहकारों को निर्देश दिया है कि वे अपनी फाइलों में मौजूद 14 कमियों को जल्द से जल्द ठीक करें। इनमें गलत तरीके से नाम दर्ज करना और वकालतनामा न होना जैसी तकनीकी खामियां शामिल हैं। उम्मीद है कि इन सुधारों के बाद बुधवार या गुरुवार तक मामलों की लिस्टिंग हो जाएगी। इस बेंच में जस्टिस सूर्यकांत के साथ जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं।
प्रदर्शनकारियों की हिरासत और कानूनी विवाद
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने एक अवमानना याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का उल्लंघन किया गया है, जिसमें यह साफ कहा गया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए।
बता दें कि दिल्ली में यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ है। इसके चलते 'चलो संसद' मार्च निकाला गया और जंतर मंतर व कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में भारी हंगामा हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से कदम उठाने पर हलफनामा मांगा है और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हालांकि वह स्थिति पर नजर रख रहा है, लेकिन प्रदर्शनों का प्रबंधन अंततः कानून-व्यवस्था का मुद्दा है। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट भी इस मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें प्रदर्शनकारियों पर हुए हमलों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।