वोटर लिस्ट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की अवैध हिरासत पर लगाई रोक

राजधानी दिल्ली में चुनावी मतदाता सूची के संशोधन को लेकर मचे भारी बवाल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा हस्तक्षेप किया है। 11 अक्टूबर 2026 को एक विशेष रविवार बैठक के दौरान, अदालत ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों को अवैध रूप से हिरासत में न लिया जाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाओं के कामकाज में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए, ताकि आम जनता को परेशानी न हो।
यह पूरा विवाद चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे 'विशेष गहन संशोधन' (Special Intensive Revision) से शुरू हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी और अन्य विपक्षी समूहों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के नाम पर लाखों असली मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं। विपक्षी नेताओं का दावा है कि देश भर में करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं, जबकि अकेले दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 33 प्रतिशत की कटौती देखी गई है। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है ताकि केवल पात्र नागरिक ही पंजीकृत रहें।
अदालत के कड़े निर्देश और पुलिस की कार्रवाई
जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहाना की बेंच ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि जिन क्षेत्रों में धारा 163 BNSS लागू है, वहां भी शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने वालों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए। इसके अलावा, इंटरनेट सेवाओं को कानून के मुताबिक चालू रखने और बेवजह लगाए गए बैरिकेड्स की समीक्षा करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि पत्रकारों और वकीलों के पेशेवर कार्यों में कोई रुकावट न आए।
यह आदेश 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शनों के बाद आया, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने भारी सुरक्षा बल तैनात किया था और कई मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए थे, जिसके चलते लगभग 3,000 से 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें कई प्रभावशाली लोग और विपक्षी नेता भी शामिल थे।
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को 50,000 रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया गया है। उन्होंने एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर अपनी आजादी हासिल की। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकालने का ऐलान किया है, ताकि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और संशोधन प्रक्रिया को रोकने की मांग सौंपी जा सके। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने औपचारिक मुलाकात के अनुरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला अभी विचाराधीन है।