दिल्ली-NCR वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पराली प्रबंधन के लिए दिए कड़े निर्देश
दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण और पराली जलाने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, छोटे किसानों के लिए मशीनरी और तय कीमत के निर्देश दिए।

राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में गहराते जहरीले धुंध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली-NCR वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर सुनवाई करते हुए इसे बेहद चिंताजनक बताया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस संकट से निपटने के लिए अब केवल बातों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
कोर्ट ने विशेष रूप से पराली जलाने की समस्या पर ध्यान केंद्रित किया। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि पराली की खरीद के लिए उसकी कीमत पहले से तय की जाए, ताकि किसान उसे जलाने के बजाय बेचने के लिए प्रेरित हों। इसके साथ ही, छोटे किसानों की मदद के लिए ग्राम पंचायतों को अवशेष प्रबंधन (residue management) की मशीनें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
AQI पहुंचा 'गंभीर' स्तर पर, दिवाली से पहले बढ़ी चिंता
शहर की हवा की स्थिति इस समय डराने वाली है। 6 नवंबर 2026 तक दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 389 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। वहीं, रोहिणी और IIT दिल्ली जैसे इलाकों में तो हालात और भी बदतर हैं, जहां AQI 474 तक पहुंच गया है, जिसे 'गंभीर' माना जाता है। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले सप्ताहांत में हवा की दिशा और दिवाली के पटाखों के कारण स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में PM2.5 के स्तर में पराली जलाने का योगदान लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार को यह 15.6% था, जो शुक्रवार तक 19.2% होने का अनुमान है। वहीं, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का असर भी शनिवार तक 21.1% तक पहुंचने की संभावना है।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने प्रदूषण नियंत्रण प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने की अपील की है। उन्होंने पंजाब सरकार के हवाले से बताया कि पराली का एक बड़ा हिस्सा पहले ही जलाया जा चुका है। फिलहाल, 1 नवंबर से लागू 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के तहत निर्माण कार्यों पर रोक और वाहनों के प्रवेश पर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं, ताकि हवा में जहर को कम किया जा सके।