दिल्ली जिमखाना क्लब टेकओवर: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को याचिका सुनने का दिया निर्देश

दिल्ली के प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब के टेकओवर को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में एक नया मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह क्लब के 11 सदस्यों द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करे, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा क्लब के 27.3 एकड़ परिसर को अपने कब्जे में लेने के फैसले को चुनौती दी गई है। दरअसल, इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने इस याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया था कि केवल क्लब ही इस कार्रवाई का विरोध करने का कानूनी अधिकार रखता है, सदस्य नहीं।
यह पूरा विवाद जुलाई 2026 से शुरू हुआ था, जब केंद्र सरकार ने 'पब्लिक प्रिसिसेस (इविक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्यूपेंट्स) एक्ट, 1971' के तहत बेदखली की कार्रवाई शुरू की थी। सरकार का तर्क है कि लीज डीड के क्लॉज 4 के तहत उसे यह अधिकार है कि वह सार्वजनिक उद्देश्यों, जैसे रक्षा बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए संपत्ति को वापस ले सके। केंद्र का दावा है कि क्लब द्वारा इस जमीन का कब्जा अब अनधिकृत हो चुका है।
संविधान और अधिकारों की लड़ाई
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। याचिका में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g), 21 और 300A का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह कार्रवाई संपत्ति के अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता को छीनने जैसी है।
इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस अमित महाजन ने इस मामले में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, एस्टेट ऑफिसर और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड को औपचारिक नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर 2026 की तारीख तय की है।
वहीं, एक अन्य घटनाक्रम में दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर एक अलग मुकदमे में जस्टिस प्रतीक jalan ने खुद को मामले से अलग कर लिया है। उन्होंने व्यक्तिगत संलिप्तता का हवाला देते हुए इस मामले को किसी दूसरी बेंच के सामने पेश करने का निर्देश दिया है। फिलहाल, विजय खुराना जैसे व्यक्तिगत सदस्यों और क्लब की कानूनी लड़ाई जारी है, जिससे इस ऐतिहासिक परिसर का भविष्य अधर में लटका हुआ है।