दिवाली के बाद दिल्ली में बिगड़ेगी हवा, सुप्रीम कोर्ट ने जताई गहरी चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में दिवाली के बाद बिगड़ने वाली हवा पर जताई चिंता, कहा- जज घर नहीं बैठ सकते।

देश की राजधानी में हर साल की तरह इस बार भी दिवाली के बाद वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने की आशंका है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या को अब केवल एक 'सालाना रस्म' या मौसमी घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि हवा की यह गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि जज भी इससे अछूते नहीं हैं, लेकिन वे प्रदूषण से बचने के लिए केवल घर पर नहीं बैठ सकते। यह टिप्पणी इस बात की गंभीरता को दर्शाती है कि दिल्ली की हवा कितनी जहरीली हो चुकी है। गौरतलब है कि 28 अक्टूबर की सुबह दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 232 दर्ज किया गया, जिसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 'खराब' श्रेणी में रखा है।
प्रदूषण रोकने के लिए कड़े कदम और पाबंदियां
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए प्रशासन ने कई सख्त कदम उठाए हैं। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 21 अक्टूबर से ही दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को लागू कर दिया है। इसके अलावा, बाहरी वाहनों पर भी लगाम कसी गई है। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली में गैर-BS-VI पंजीकृत पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। हालांकि, इलेक्ट्रिक, सीएनजी और आपातकालीन वाहनों को इस पाबंदी से छूट दी गई है।
कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि वह इस मामले की निगरानी के लिए महीने में दो बार सुनवाई करेगा ताकि अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों समाधान निकाले जा सकें। जहां तक पटाखों की बात है, कोर्ट ने धार्मिक और भावनात्मक भावनाओं का सम्मान करते हुए देशव्यापी प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन उनके उपयोग के समय पर प्रतिबंध और जन-जागरूकता पर जोर दिया है।
दूसरी ओर, पर्यावरण मंत्री मनिंदर सिंह सिरसा ने इस संकट से निपटने के लिए अंतर-राज्य समन्वय की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि भारी ट्रकों के ट्रैफिक को ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर मोड़ने जैसे उपायों को सख्ती से लागू करना अनिवार्य है ताकि शहर के भीतर प्रदूषण का बोझ कम हो सके।