पटाखों पर बैन लागू करने में नाकाम दिल्ली सरकार, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
पटाखों पर प्रतिबंध लागू न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और CAQM को फटकारा, ग्रीन पटाखों की प्रभावशीलता पर उठाए सवाल।

देश की राजधानी और आसपास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर बढ़ना अब सुप्रीम कोर्ट के गुस्से का कारण बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दिल्ली और NCR में पटाखों पर लगे प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने में प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वरले की बेंच ने इस बात पर हैरानी जताई कि हवा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए दिए गए न्यायिक निर्देश अब केवल "किताबी" बनकर रह गए हैं और बार-बार होने वाले नियमों के उल्लंघन को एक "मजाक" की तरह लिया जा रहा है।
ग्रीन पटाखों की सच्चाई और प्रशासन की लापरवाही
अदालत ने इस मामले में 'ग्रीन पटाखों' की प्रभावशीलता पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि所谓的 ग्रीन पटाखे भी पारंपरिक पटाखों की तुलना में लगभग 70% हानिकारक धुआं छोड़ते हैं, जिससे प्रदूषण में कोई खास कमी नहीं आती। बेंच ने प्रवर्तन एजेंसियों से कड़े सवाल पूछे कि क्या उनकी टीमों ने वास्तव में जमीन पर जाकर निरीक्षण किया है और क्या उनके पास इस बात का कोई पुख्ता डेटा है। कोर्ट ने साफ कहा कि अधिकारी अब बार-बार एक ही तरह की दलीलें देने के बजाय जमीनी स्तर पर परिणाम दिखाएं, ताकि धार्मिक भावनाओं, जनस्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जा सके।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि प्रदूषण रोकने के लिए तंत्र मौजूद है और दिल्ली सरकार ने सर्दियों के लिए अपनी रणनीति को मजबूत करते हुए 608 एंटी-स्मॉग गन तैनात की हैं। हालांकि, कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी। रिपोर्ट के मुताबिक, CAQM की कुल 29 यूनिट्स में से केवल नौ ही सक्रिय रूप से काम कर रही थीं।
युवा पीढ़ी को जागरूक करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक दिलचस्प सुझाव भी दिया। अदालत ने कहा कि अधिकारियों को विराट कोहली जैसी मशहूर हस्तियों की मदद लेनी चाहिए, ताकि युवाओं को पटाखों से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के प्रति जागरूक किया जा सके। इसके साथ ही, कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे विभिन्न क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के उतार-चढ़ाव का डेटा इकट्ठा करें, ताकि GRAP-1 के प्रभाव का सही आकलन किया जा सके। अब सभी की नजरें कोर्ट के अंतिम फैसले पर हैं, जो दिवाली से पहले पटाखों को लेकर प्रोटोकॉल स्पष्ट करेगा।