दिल्ली में पब्लिक ड्रिंकिंग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुलिस को दिए कार्रवाई के आदेश

राजधानी दिल्ली की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने वालों की अब खैर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस को बेहद सख्त निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर शराब का सेवन करने वालों के खिलाफ अब पूरी सख्ती से अभियान चलाया जाए। कोर्ट ने यह कदम पिछले दो महीनों में दिल्ली-NCR में हुई यौन हिंसा सहित तीन बड़ी आपराधिक घटनाओं का स्वतः संज्ञान (suo motu) लेने के बाद उठाया है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जे.बी. पारदीवाला ने साफ तौर पर कहा कि पुलिस को अपराधियों के मन में डर पैदा करने के लिए जरूरी सख्ती बरतनी होगी। अदालत का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने से न केवल अनुशासन बिगड़ता है, बल्कि यह अपराधों की दर को भी बढ़ाता है, जिससे आम जनता की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
अवैध शराब केंद्रों पर रहेगी पैनी नजर
अदालत ने केवल सार्वजनिक शराब पीने पर ही नहीं, बल्कि राजधानी में चल रहे हजारों अवैध फूड और बेवरेज आउटलेट्स पर भी गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने पाया कि कई ऐसे ठिकाने हैं जो चोरी-छिपे शराब परोस रहे हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक हैं। इस दौरान 2012 के निर्भया मामले का जिक्र करते हुए कोर्ट ने याद दिलाया कि उस घटना के आरोपियों ने भी इसी तरह के एक अवैध प्रतिष्ठान में शराब पी थी। इसी खतरे को देखते हुए दिल्ली पुलिस को इन अनधिकृत ठिकानों की निगरानी बढ़ाने का आदेश दिया गया है।
दूसरी ओर, दिल्ली आबकारी आयुक्त सनी के. सिंह ने अक्टूबर और नवंबर 2026 के लिए 'ड्राय डे' का शेड्यूल भी जारी किया है। नियमों के मुताबिक, 2 अक्टूबर (गांधी जयंती), 8 नवंबर (दिवाली) और 24 नवंबर (गुरु नानक जयंती) को सभी थोक, रिटेल दुकानों, होटलों, रेस्टोरेंट और क्लबों में शराब की बिक्री पूरी तरह बंद रहेगी। हालांकि, L-15 और L-15F लाइसेंस वाले होटलों में रुकने वाले मेहमानों को इससे छूट दी गई है।
बता दें कि मौजूदा आबकारी कानूनों के तहत सार्वजनिक रूप से शराब पीना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।