सेंट्रल सीक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के लिए जगह पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब

देश की 135 साल पुरानी सेंट्रल सीक्रेटेरिएट लाइब्रेरी स्पेस और उसके संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सरकार को तीन हफ्ते के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। दरअसल, मामला यह है कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी को शिफ्ट किया जाना है, लेकिन आवंटित जगह की पर्याप्तता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
5 अक्टूबर 2026 को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने इस मुद्दे पर सुनवाई की। कोर्ट ने हैरानी जताई कि जिस लाइब्रेरी में 8.5 लाख से ज्यादा किताबें हैं, उसके लिए नई योजना में कितनी जगह रखी गई है। अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि क्या आवंटित क्षेत्र इतना बड़ा है कि इसमें शास्त्री भवन की पूरी लाइब्रेरी समा सके? साथ ही, आरके पुरम में कार्टन में रखी गई करीब 2 लाख अतिरिक्त किताबों के लिए भी जगह सुनिश्चित की गई है या नहीं।
सिर्फ दो कमरों का प्रस्ताव? कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार ने उन रिपोर्ट्स का जिक्र किया, जिनमें कहा गया था कि कर्तव्य भवन-2 में केवल दो कमरे (कुल 300 वर्ग मीटर) प्रस्तावित किए गए हैं। गौरतलब है कि संस्कृति मंत्रालय ने पहले ही इस जगह को नाकाफी बताया था। जब एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दावा किया कि जगह निर्धारित कर दी गई है, तो जस्टिस कुमार ने सीधा सवाल किया, "क्या आप केवल दो कमरे आवंटित कर रहे हैं?"
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) ने 17 सितंबर 2026 को एक आदेश जारी कर लाइब्रेरी को 30 सितंबर तक शास्त्री भवन खाली करने को कहा, ताकि वहां पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया जा सके। हालांकि, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर दावा किया था कि कर्तव्य पथ पुनर्विकास के भीतर लाइब्रेरी के लिए जगह दी गई है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इसके आधिकारिक लेआउट प्लान और स्पेसिफिकेशन मांगे हैं।
इस ऐतिहासिक संस्थान को बचाने के लिए सीनियर एडवोकेट हरिप्रिया पद्मनाभन को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है। बता दें कि यह लाइब्रेरी कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी सरकारी लाइब्रेरी है, जिसकी विरासत को बचाना अब कानूनी चुनौती बन गया है।