सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भूपेश अरोड़ा की जमानत रद्द, रोहित विज की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चीनी निवेश ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने भूपेश अरोड़ा की जमानत को रद्द कर दिया है और सह-आरोपी रोहित विज की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह आदेश जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। अदालत ने कहा कि मुख्य अपराध में समझौता होने से प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के तहत चल रही आपराधिक कार्रवाई अपने आप खत्म नहीं होती है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में भूपेश अरोड़ा को नियमित जमानत दे दी थी।
चीनी निवेश ऐप से जुड़ा है पूरा मामला
यह पूरा मामला फर्जी चीनी निवेश ऐप नेटवर्क से जुड़ा हुआ है जिसकी जांच ईडी कर रही है। इन ऐप में LOXAM जैसे नाम शामिल हैं जो निवेशकों को ज्यादा मुनाफा देने का लालच देते थे। ईडी के अनुसार इन ऐप से मिलने वाले पैसों को कई बैंक खातों और कंपनियों के जरिए घुमाया जाता था। इसके बाद इन पैसों को कैश और विदेशी मुद्रा में बदलकर हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजा जाता था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस अवैध नेटवर्क में चीनी और ताइवानी नागरिक भी शामिल थे जिन्होंने कंपनियां और बैंक खाते बनाए थे।
आरोपियों की भूमिका और कानूनी कार्रवाई
ईडी की जांच में दोनों आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाएं सामने आई हैं। एजेंसी का आरोप है कि रोहित विज ने फंड को एक जगह से दूसरी जगह भेजने में अहम भूमिका निभाई थी। विज रंजन मनीकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड और केडीएस फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों से जुड़ा था जिनके जरिए बैंक ट्रांसफर के पैसों को कैश और विदेशी मुद्रा में बदला जाता था। दूसरी ओर भूपेश अरोड़ा पर शेल कंपनियों से जुड़े होने और अपराध से मिलने वाली कमाई को छिपाने का गंभीर आरोप है। इस मामले में ईडी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक और वकील अर्काज कुमार पेश हुए थे।