सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गुरुग्राम के चिंतल पैराडिसो के 370 मकान मालिकों के लिए पुनर्विकास रोडमैप मंजूर

गुरुग्राम के चिंतल पैराडिसो सोसाइटी में चार साल पहले हुए दर्दनाक हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 370 मकान मालिकों के लिए पुनर्विकास रोडमैप को अंतिम रूप दे दिया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच ने 3 सितंबर 2026 को यह आदेश जारी किया, जिसे 11 सितंबर 2026 को अपलोड किया गया। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, टावर ए, बी, सी और जे के सभी शेषनिवासियों को 1 जनवरी 2027 तक अपने फ्लैट खाली करने होंगे। कोर्ट ने साफ किया है कि इस डेडलाइन में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।
10 फरवरी 2022 को टॉवर डी के छठी मंजिल के फ्लैट का एक हिस्सा गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद आईआईटी दिल्ली और केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) ने स्ट्रक्चरल ऑडिट किया था। ऑडिट में पता चला कि कंक्रीट में उच्च क्लोराइड स्तर के कारण रीइनफोर्समेंट स्टील में गंभीर जंग लग गया था। इसके बाद सीबीआरआई ने सेक्टर 109 की पूरी हाउसिंग प्रोजेक्ट को रहने के लिएअसुरक्षित घोषित कर दिया था। हालांकि फेज-वन के टावर (डी, ई, एफ, जी और एच) को गिराने का काम पूरा हो चुका है, लेकिन रेजिडेंट्स के विरोध के कारण फेज-टू का पुनर्निर्माण रुक गया था।
कोर्ट की स्वीकृत योजना के तहत, चिंतल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (CIPL) को विस्थापित मकान मालिकों के किराए के भुगतान के लिएएस्क्रो खाते में 5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, प्रभावित फेज-टू टावर के प्रत्येक मकान मालिक को 40,000 रुपये का एकमुश्त स्थानांतरण शुल्क मिलेगा। कोर्ट ने शोभा लिमिटेड को फेज-टू को अल्ट्रा-लक्जरी कॉम्प्लेक्स में बदलने के लिए अधिकृत किया है। निर्माण कार्य खाली करने की तारीख से 48 महीनों के भीतर पूरा किया जाना है, जो जरूरी वैधानिक स्वीकृतियों के अधीन होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस पुनर्विकास ढांचे से जुड़ी सभी भविष्य की शिकायतें, विवाद या कानूनी दावेविशेष रूप से उसकी बेंच के समक्ष ही दायर किए जाने चाहिए, जिससे किसी अन्य प्राधिकरण को दंडात्मक या रोक लगाने वाले आदेश जारी करने से रोका जा सके। इस कानूनी हस्तक्षेप से पहले इस ढहाने की घटना की सीबीआई जांच हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप जनवरी 2024 में एक पूरक चार्जशीट दाखिल की गई थी जिसमें सीआईपीएल के सीएमडी अशोक सोमन और सात अन्य लोगों को लापरवाही और घटिया निर्माण के आरोपों में नामजद किया गया था।