सुकेश चंद्रशेखर को भ्रष्टाचार मामले में रिहाई के आदेश, अधिकतम सजा से ज्यादा समय काट चुके हैं आरोपी
दिल्ली कोर्ट ने सुकेश चंद्रशेखर को भ्रष्टाचार मामले में रिहा करने का आदेश दिया है, क्योंकि उसने अधिकतम सजा से ज्यादा समय जेल में बिताया।

दिल्ली की एक अदालत ने कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर को भ्रष्टाचार के एक मामले में रिहा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पाया कि सुकेश ने इस मामले में निर्धारित अधिकतम सात साल की सजा से कहीं अधिक समय, यानी 8 साल, 9 महीने और 14 दिन जेल में बिता दिए हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विद्या प्रकाश ने आदेश दिया कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है, तो उसे इस विशेष मामले में तुरंत रिहा किया जाए।
हालांकि, यह आदेश सुकेश की जेल से पूरी तरह रिहाई नहीं है। वह अभी भी कई अन्य आपराधिक मामलों में मुकदमे का सामना कर रहा है, इसलिए वह उन मामलों के कारण हिरासत में रहेगा। कोर्ट ने उसे अगली सुनवाई की तारीख तक 1 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने का निर्देश भी दिया है।
कानूनी प्रावधान और कोर्ट की टिप्पणी
सुकेश के वकील अनंत मलिक ने सीआरपीसी की धारा 436A, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 479 और संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए रिहाई की अर्जी दी थी। वकील ने दलील दी कि आरोपी ने उस अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम सजा की अवधि से ज्यादा समय हिरासत में बिता लिया है।
अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि कानूनन किसी भी विचाराधीन कैदी (undertrial prisoner) को निर्धारित अधिकतम सजा की अवधि से अधिक समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रावधान में 'shall' शब्द का उपयोग यह दर्शाता है कि यह अनिवार्य है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि कार्यवाही में देरी के लिए सुकेश जिम्मेदार था।
सुकेश को इस मामले में 24 अक्टूबर 2017 को गिरफ्तार किया गया था। जेल अधिकारियों के रिकॉर्ड के अनुसार, पैरोल और अंतरिम जमानत की अवधि को हटाकर भी वह 27 अक्टूबर तक 8 साल, 9 महीने और 14 दिन जेल में रहा, जो कि अधिकतम सात साल की सजा से 1 साल 9 महीने 14 दिन ज्यादा है।
अभियोजन पक्ष ने इस रिहाई का विरोध करते हुए तर्क दिया कि सुकेश विभिन्न राज्यों में दर्ज 29 आपराधिक मामलों में शामिल है और उस पर MCOCA जैसे गंभीर कानून के तहत भी आरोप हैं। लेकिन अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अधिकतम सजा अवधि पूरी होने के बाद हिरासत जारी रखना अवैध होगा और यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।