दिल्ली में 'स्टडी इन स्वीडन 2026' फेयर का आयोजन, उच्च शिक्षा के लिए उमड़े भारतीय छात्र

दिल्ली में आयोजित स्टडी इन स्वीडन 2026 फेयर में 300 से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया और स्वीडिश यूनिवर्सिटीज के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में 'स्टडी इन स्वीडन 2026' फेयर का आयोजन, उच्च शिक्षा के लिए उमड़े भारतीय छात्र

विदेश में पढ़ाई का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए नई दिल्ली में आयोजित 'स्टडी इन स्वीडन 2026' फेयर एक बड़ा अवसर साबित हुआ। स्वीडन के दूतावास द्वारा आयोजित इस इवेंट में छात्रों का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला, जहां उन्होंने स्वीडन की मशहूर यूनिवर्सिटीज में मास्टर प्रोग्राम, रिसर्च और भविष्य के करियर विकल्पों के बारे में विस्तार से जाना। इस फेयर में 300 से अधिक छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जो यह दर्शाता है कि भारतीय युवाओं के बीच स्वीडिश उच्च शिक्षा की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

इस आयोजन के दौरान छात्रों को स्वीडन के शीर्ष विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों से सीधे बात करने का मौका मिला। उन्होंने एडमिशन की शर्तों, रेजिडेंस परमिट, वहां के छात्र जीवन और करियर की संभावनाओं पर सीधा मार्गदर्शन प्राप्त किया। फेयर में लुंड यूनिवर्सिटी जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ-साथ KTH रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने भी हिस्सा लिया। KTH ने विशेष रूप से इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा और बायोटेक्नोलॉजी में रुचि रखने वाले छात्रों को आकर्षित किया। इसके अलावा, लिंकोपिंग यूनिवर्सिटी ने इनोवेशन और प्रैक्टिकल लर्निंग पर जोर देते हुए अपने इंटरडिसिप्लिनरी कोर्स की जानकारी दी।

स्वीडन में पढ़ाई और करियर के अवसर

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कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए भारत में स्वीडन की राजदूत पेट्रा मेनांडर ने छात्रों के उत्साह की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह देखना सुखद है कि छात्र अपने रिसर्च और करियर को लेकर इतने स्पष्ट सवाल लेकर आए हैं। राजदूत ने उम्मीद जताई कि इस तरह के संवादों से अधिक भारतीय छात्र स्वीडन के शैक्षणिक समुदाय का हिस्सा बनेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।

फेयर की खास बात यह रही कि इसमें केवल यूनिवर्सिटी प्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि पूर्व छात्र (alumni) भी शामिल हुए। KTH और जोंकोपिंग यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि अंतरराष्ट्रीय माहौल में पढ़ाई करना और स्वीडन के जीवन में ढलना कैसा होता है। छात्रों को यह भी बताया गया कि स्वीडन में लगभग 1000 मास्टर प्रोग्राम अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध हैं, जो इसे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाते हैं।

इस आयोजन में जोंकोपिंग यूनिवर्सिटी, स्वीडिश यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (SLU) और यूनिवर्सिटी ऑफ बोरास जैसी संस्थाओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह फेयर विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन के क्षेत्र में भारत और स्वीडन के बीच बढ़ते सहयोग का प्रतीक है। दिल्ली के बाद अब यह फेयर 30 अक्टूबर को हैदराबाद में आयोजित किया जाएगा, ताकि वहां के छात्र भी इन अवसरों का लाभ उठा सकें।

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