MCD पब्लिक टॉयलेट की सफाई अब करेंगे छात्र, हाई कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने MCD के सार्वजनिक शौचालयों की निगरानी के लिए छात्रों की टीमें बनाने का निर्देश दिया है।

Kittu Kumari23 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
MCD पब्लिक टॉयलेट की सफाई अब करेंगे छात्र, हाई कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

दिल्ली के सार्वजनिक शौचालयों की बदहाली अब केवल शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इनकी निगरानी के लिए अब युवाओं की टीम मैदान में उतरेगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नगर निगम (MCD) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले पब्लिक टॉयलेट्स की स्वच्छता और स्थिति की निगरानी के लिए छात्रों की टीमें बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट का मानना है कि साफ-सुथरे शौचालयों तक पहुंच 'जीवन के अधिकार' का एक बुनियादी हिस्सा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन डब्ल्यू. साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एमसीडी द्वारा पिछले प्रयासों के बावजूद इन सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं रही है। इसी समस्या के समाधान के लिए दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क, जामिया मिलिया इस्लामिया के सोशल वर्क विभाग और अदिति महाविद्यालय के छात्रों को इस मुहिम से जोड़ा गया है।

सरप्राइज इंस्पेक्शन और सीधी रिपोर्टिंग

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इन टीमों में महिला और पुरुष दोनों छात्र शामिल होंगे, जो अचानक निरीक्षण (सरप्राइज इंस्पेक्शन) करेंगे। वे शौचालयों की वास्तविक स्थिति की तस्वीरें लेंगे और उनका पूरा दस्तावेजीकरण करेंगे। इन रिपोर्ट्स को सीधे एमसीडी के सैनिटेशन प्रभारी एडिशनल कमिश्नर को सौंपा जाएगा। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया है कि छात्रों को उनके परिवहन, फोटोग्राफी और अन्य खर्चों के लिए मानदेय (honorarium) दिया जाए।

यह पूरा मामला 2023 में जन सेवा वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जिसमें सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव और स्वच्छता में सुधार की मांग की गई थी। कोर्ट ने साफ कर दिया कि वह नगर निगम के दैनिक कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता, लेकिन एक प्रभावी निगरानी तंत्र बनाना जरूरी है।

अदालत ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि इस प्रोजेक्ट के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने में लापरवाही बरती गई, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही, यदि किसी खास इलाके में सफाई या स्ट्रक्चरल मेंटेनेंस में लगातार खामियां पाई गईं, तो संबंधित डिप्टी कमिश्नर और चीफ इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर, 2026 को होगी।

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