पराली जलाने पर अब लगेगा भारी जुर्माना, सरकार ने तैयार किया नया एक्शन प्लान

दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक सख्त रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया है, जो 2026 से प्रभावी होगा। इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR में फसल अवशेषों (पराली) को जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लगाना है।
नए नियमों के तहत अब पराली जलाने वाले किसानों पर उनकी जमीन के आकार के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा। जिन किसानों के पास दो एकड़ से कम जमीन है, उन पर 5,000 रुपये का जुर्माना होगा। दो से पांच एकड़ के बीच जमीन रखने वालों को 10,000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक जमीन वाले किसानों को 30,000 रुपये तक का भुगतान करना होगा। इतना ही नहीं, नियम तोड़ने वाले खेतों को 15 महीने के लिए 'रेड कैटेगरी' में डाल दिया जाएगा, जिससे वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं। बार-बार गलती करने या जुर्माना न भरने पर इस अवधि को और 15 महीने बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने इन ड्राफ्ट नियमों पर 7 नवंबर, 2026 तक जनता से सुझाव मांगे हैं।
प्रदूषण का खतरा और दिल्ली का विंटर एक्शन प्लान
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 6 अक्टूबर, 2026 के बीच सात राज्यों में पराली जलाने की 287 घटनाएं दर्ज की गईं। इसमें मध्य प्रदेश सबसे आगे रहा, जबकि पंजाब में पिछले सात वर्षों में सबसे कम घटनाएं देखी गईं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अब किसान सैटेलाइट की नजर से बचने के लिए शाम के समय पराली जला रहे हैं।
दूसरी ओर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पंजाब सरकार पर केंद्रीय फंड और मशीनों का सही इस्तेमाल न करने का आरोप लगाया है। राजधानी में प्रदूषण से लड़ने के लिए 'दिल्ली विंटर एक्शन प्लान 2026-27' लागू कर दिया गया है। इसके तहत 1 अक्टूबर, 2026 से 'नो PUCC, नो फ्यूल' पॉलिसी लागू की गई है, यानी बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट के वाहनों में ईंधन नहीं भरा जा सकेगा।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने हरियाणा और पंजाब के 34 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं। वहीं, IIT दिल्ली के विशेषज्ञ सग्निक डे ने आगाह किया है कि अक्टूबर-नवंबर में प्रदूषण में पराली का योगदान 25-30% होता है, लेकिन वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले धुएं पर भी साल भर ध्यान देना जरूरी है। SAFAR के संस्थापक गुफरान बेग ने चेतावनी दी है कि 'सुपर एल नीनो' के कारण बारिश कम और हवा की रफ्तार धीमी रहेगी, जिससे 8 नवंबर को दिवाली तक प्रदूषकों का जमाव और अधिक बढ़ सकता है।