उत्तर भारत के सात राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में 26% की गिरावट, पंजाब सबसे आगे

उत्तर भारत के सात राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में 26.63% की गिरावट आई है। जानिए किन राज्यों में सबसे ज्यादा आग लगी।

Kittu Kumari2 November 20262 min read0 viewsNational
उत्तर भारत के सात राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में 26% की गिरावट, पंजाब सबसे आगे

दिल्ली और आसपास के इलाकों में सर्दियों के साथ बढ़ते प्रदूषण के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर भारत के सात राज्यों में इस सीजन में पराली जलाने की घटनाओं में 26.63 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। ICAR-CREAMS प्रयोगशाला के आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 1 नवंबर के बीच कुल 3,316 घटनाओं की रिपोर्ट मिली है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में काफी कम है। यह गिरावट क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता सुधार के प्रयासों के सकारात्मक असर का संकेत दे रही है।

अगर राज्यों के हिसाब से देखें तो पंजाब में सबसे ज्यादा आग की घटनाएं देखी गईं। पंजाब में कुल 1,514 मामले दर्ज हुए, जो सभी सात राज्यों की कुल घटनाओं का लगभग आधा है। इसके बाद राजस्थान में 671, मध्य प्रदेश में 566, उत्तर प्रदेश में 345, उत्तराखंड में 176 और हरियाणा में 42 घटनाएं दर्ज की गईं। वहीं दिल्ली में केवल 2 मामले सामने आए।

इन इलाकों में रहा आग का सबसे ज्यादा असर

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सैटेलाइट सेंसर के जरिए मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब के अमृतसर, फिरोजपुर, कपूरथला, संगरूर, बठिंडा, फरीदकोट, पटियाला, बरनाला और फाजिल्का सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। राजस्थान में बारां, बूंदी, गंगानगर, हनुमानगढ़, कोटा और सवाई माधोपुर मुख्य हॉटस्पॉट रहे, जबकि मध्य प्रदेश के शिवपुर, सीहोर, नर्मदापुरम, गुना, दतिया और अशोकनगर में अधिक आग लगाई गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच केवल 10 से 25 दिनों का समय पाते हैं, इसलिए फसल अवशेषों को साफ करने के लिए आग लगाना सबसे सस्ता और तेज तरीका लगता है। हालांकि, सरकार इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है।

सरकार 'क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट' स्कीम के तहत मशीनों पर सब्सिडी दे रही है, जिसमें व्यक्तिगत किसानों को 50% और सहकारी समितियों को 80% तक की मदद दी जा रही है। हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी मशीनों के जरिए अवशेषों के प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जा रहा है और FIR भी दर्ज की जा रही है।

आने वाले हफ्तों में जैसे-जैसे गेहूं की बुवाई का समय करीब आएगा, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और राज्य सरकारें निगरानी और प्रवर्तन टीमों को और तेज करेंगी। नवंबर के अंत तक सैटेलाइट मॉनिटरिंग जारी रहेगी, ताकि दिल्ली-NCR में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए GRAP जैसे उपायों को सही समय पर लागू किया जा सके।

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