पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून: 10 साल की सजा और 50 लाख तक का जुर्माना

दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और युवाओं के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने पेपर लीक जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए लोकसभा में एक सख्त विधेयक पेश किया है। इस नए बदलाव से जुड़े मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
* लोकसभा में पेश हुआ Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026
* दोषियों के लिए न्यूनतम सजा 3 साल से बढ़ाकर 5 साल की गई
* अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया
* जांच पूरी करने के लिए 2 महीने का तय समय निर्धारित
कड़े प्रावधान और भारी जुर्माने की तैयारी
केंद्र सरकार ने 27 जुलाई को लोकसभा में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पेश किया है। यूनियन मिनिस्टर जितेंद्र सिंह ने इस बिल को सदन में रखा, जो साल 2024 के पुराने कानून को और ज्यादा मजबूत बनाता है। इस नए संशोधन का उद्देश्य परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना है। मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार पिछले अनुभवों से सीख रही है और हाल के वर्षों में पेपर लीक से जुड़े मामलों में आत्महत्या के मामलों में कमी आई है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप Lok Sabha Official Website पर देख सकते हैं।
अपराध गैर-जमानती और सजा हुई दोगुनी
प्रस्तावित संशोधनों के तहत कानून के तहत आने वाले सभी अपराधों को cognisable, non-bailable (संज्ञेय और गैर-जमानती) बना दिया गया है। परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले व्यक्तियों के लिए न्यूनतम जेल की सजा को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल और अधिकतम सजा को 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है। इसके अलावा, अधिकतम जुर्माना भी 10 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 50 लाख रुपये कर दिया गया है। परीक्षा आयोजित करने वाली सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों पर अब 1 करोड़ की जगह 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लग सकता है और उन्हें 4 साल की बजाय 8 साल के लिए परीक्षा संबंधी कामों से बैन किया जा सकता है।
संगठित अपराध पर कड़ा शिकंजा और जांच का समय
यदि परीक्षा में गड़बड़ी करने के मामले 'संगठित' और सुनियोजित तरीके से किए गए हैं, तो इस बिल में न्यूनतम जेल की सजा को 5 साल से बढ़ाकर 7 साल कर दिया गया है और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान जोड़ा गया है। इसके साथ ही, बिल में नई धाराएं 12A और 12B जोड़ी गई हैं, जिसके तहत केंद्र द्वारा मामला सौंपे जाने पर जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। साथ ही, CJP (CJP) पिछले 12 वर्षों की परीक्षा असफलताओं और भर्ती में देरी पर एक White Paper जारी करने की मांग कर रही है, जिसे संसद में पेश किया जाना चाहिए।