दिल्ली-NCR क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए अधिकारियों ने तय उम्र सीमा पार कर चुके वाहनों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। मेरठ के एआरटीओ प्रवर्तन सुधांशु रंजन ने पुष्टि की है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को जब्त कर कबाड़ में बदलने की कार्रवाई तेजी से चल रही है। मौजूदा नियमों के तहत एनसीआर में 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों का चलना या सार्वजनिक स्थानों पर पार्क करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
16 सितंबर 2026 को गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण पांडे ने बताया कि 650 से अधिक वाहनों को जब्त करके अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्रों पर भेजा गया है। यह कार्रवाई भारत के सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के उन निर्देशों के तहत हो रही है, जिनमें सड़कों से पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने पर जोर दिया गया है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के समर्थन वाली इस नीति के तहत मौसमी पाबंदियों के बजाय पूरे साल निगरानी की जाती है।
सदस्य सचिव तरुण कुमार पिथोड ने बताया कि राज्य सत्यापन योग्य अनुपालन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
7 सितंबर 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने एनसीआर के 63 शहरों के मेयरों और स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और सख्त वाहन प्रबंधन सहित स्वच्छ हवा की पहलों में मजबूत भूमिका निभाने का आग्रह किया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने नीति की समीक्षा के लिए अप्रैल 2026 में दंडात्मक कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगाई थी, लेकिन वर्तमान प्रवर्तन से यह स्पष्ट है कि प्रतिबंध अभी भी सक्रिय है।
नियमों का पालन न करने वाली कारों के पंजीकरण प्रमाणपत्र स्वतः रद्द किए जा रहे हैं। दिसंबर 2025 के आदेश के बाद कुछ बीएस-IV (BS-IV) अनुकूल पेट्रोल वाहनों को छूट दी गई है, लेकिन बीएस-III (BS-III) और इससे पुराने मॉडल पर सख्त प्रतिबंध जारी है। दिल्ली परिवहन विभाग ईंधन स्टेशनों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (ANPR) कैमरों का उपयोग कर रहा है ताकि प्रतिबंधित वाहनों की पहचान की जा सके और उन्हें ईंधन सेवाओं से वंचित किया जा सके। यदि वाहन मालिक अपने वाहनों को दिल्ली-NCR क्षेत्र से बाहर ले जाना चाहते हैं, तो उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने की सलाह दी जाती है।