स्टारलिंक से भारत की सुरक्षा को खतरा! थिंक टैंक ने अमेरिकी जासूसी और कंट्रोल की दी चेतावनी

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में अपनी एंट्री के लिए काफी समय से कोशिशें कर रही है, लेकिन अब एक गंभीर रिपोर्ट ने इस कंपनी के इरादों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली स्थित थिंक टैंक 'कुटनीति फाउंडेशन' ने एक रिसर्च पेपर जारी किया है, जिसमें स्टारलिंक को केवल एक इंटरनेट सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि अमेरिकी भू-राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने वाला एक हथियार बताया गया है। रिपोर्ट का दावा है कि स्टारलिंक "भेड़ की खाल में भेड़िए" की तरह काम कर रहा है, जो कनेक्टिविटी के नाम पर अमेरिकी खुफिया और सैन्य तंत्र को मजबूत कर रहा है।
इस रिसर्च पेपर का शीर्षक "एन अप्रेजल ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर जियोपॉलिटिकल कंट्रोल" है। इसमें चेतावनी दी गई है कि जो भी वैश्विक नेटवर्क के हब को नियंत्रित करता है, उसके पास दूसरों की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर एक्सेस को रोकने की ताकत आ जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टारलिंक अमेरिकी रक्षा विभाग, स्पेस फोर्स और नेशनल रिकोनिसेंस ऑफिस (NRO) के साथ मिलकर काम करता है, जिससे यह एक 'डुअल-यूज़' टेक्नोलॉजी बन गई है। इसका मतलब है कि यह आम लोगों को इंटरनेट देने के साथ-साथ मिसाइल ट्रैकिंग, युद्धक्षेत्र संचार और निगरानी जैसे सैन्य कार्यों में भी सक्षम है।
जासूसी का खतरा और 'किल-स्विच' की चेतावनी
कुटनीति फाउंडेशन ने अपनी रिपोर्ट में कुछ बेहद चौंकाने वाले बिंदु उठाए हैं:
- खुफिया नेटवर्क: रिपोर्ट का दावा है कि स्टारलिंक 'ECHELON' जैसे अमेरिकी खुफिया कार्यक्रमों और सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) ऑपरेशन्स में मदद करता है, जो स्थानीय सरकारों की निगरानी से बचकर काम करते हैं।
- किल-स्विच का डर: रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टारलिंक ने पहले भी राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर सेवाओं को प्रतिबंधित किया है, जिसे एक तरह का 'किल-स्विच' खतरा माना जा सकता है।
- कानूनों की अनदेखी: ब्राजील का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि कैसे स्टारलिंक लाइसेंस मिलने से पहले ही सेवाएं बेचने की कोशिश करता है और नियमों को चुनौती देता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की अपनी 'स्पेस इकोनॉमी' तेजी से बढ़ रही है, जिसकी वर्तमान वैल्यू 8 बिलियन डॉलर है और इसे अगले दशक में 40-45 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। ऐसे में स्टारलिंक जैसी विदेशी कंपनी, जिसका कंट्रोल भारत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, भारत की "तकनीकी संप्रभुता" और घरेलू स्पेस इंडस्ट्री के लिए खतरा बन सकती है।
अंत में, थिंक टैंक ने भारत सरकार को सलाह दी है कि वह विदेशी सैटेलाइट नेटवर्क के लिए सख्त और गैर-परक्राम्य (non-negotiable) लाइसेंस शर्तें लागू करे और एक सुरक्षात्मक दृष्टिकोण अपनाए, ताकि देश की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।