नई दिल्ली में श्रीलंकाई हाई कमीशन ने मनाया 'दिवाली विथ डिप्लोमैट्स', सांस्कृतिक रिश्तों की दिखी झलक
श्रीलंकाई हाई कमीशन ने दिल्ली में 'दिवाली विथ डिप्लोमैट्स' कार्यक्रम आयोजित कर भारत और श्रीलंका के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत किया।

देश की राजधानी दिल्ली में रोशनी का त्योहार दिवाली सिर्फ भारतीयों के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के राजनयिकों के लिए भी खास रहा। श्रीलंकाई हाई कमीशन ने 'दिवाली विथ डिप्लोमैट्स' (Diwali with Diplomats) नाम से एक शानदार आयोजन किया, जिसमें राजनयिक समुदाय के सदस्यों, वरिष्ठ अधिकारियों और बिजनेस जगत की हस्तियों ने शिरकत की। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूती देना था।
कार्यक्रम के दौरान भारत में श्रीलंका की हाई कमिश्नर महिशिनी कोलोन ने मेहमानों का स्वागत किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे अनौपचारिक आयोजन औपचारिक राजनयिक मुलाकातों से परे दोस्ती और आपसी समझ विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीलंका में दीपावली एक राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश है, जिसे वहां के हिंदू और तमिल समुदाय पूरी श्रद्धा के साथ मनाते हैं। कोलोन ने भावुक होते हुए कहा, "जब हम आज नई दिल्ली में दीये जला रहे हैं, तो हम केवल मेहमान बनकर दिवाली नहीं मना रहे, बल्कि हम उस त्योहार को मना रहे हैं जो श्रीलंका में भी हमारा अपना है।"
सांस्कृतिक विविधता और कला का संगम
इस खास शाम को 'दिवाली डैजल नाइट 2026' का नाम दिया गया, जिसे ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल ऑफ इंडिया (GTTCI) और लायंस क्लब दिल्ली वेज के सहयोग से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसमें हाई कमिश्नर के साथ GTTCI के अध्यक्ष गौरव गुप्ता और अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद थे।
इस आयोजन की सबसे खास बात इसमें दिखी अंतरराष्ट्रीय विविधता थी। कार्यक्रम में जहां एक ओर पुरानी दिल्ली के लजीज पकवान और हस्तशिल्प का जादू था, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सबका मन मोह लिया। मेहमानों ने एक इजरायली राजनयिक द्वारा बजाई गई सितार की मधुर धुनों का आनंद लिया और एक ईरानी कलाकार व उनके छात्रों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स की प्रदर्शनी देखी।
हाई कमीशन ने इस आयोजन के जरिए यह संदेश दिया कि अंधेरे पर प्रकाश और निराशा पर आशा की जीत का संदेश भौगोलिक सीमाओं से परे है। इस कार्यक्रम ने न केवल सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा दिया, बल्कि दुनिया भर के देशों के बीच लोगों के आपसी जुड़ाव और अंतरराष्ट्रीय मित्रता को भी एक नया आयाम दिया।