दिल्ली एयरपोर्ट पर स्पाइसजेट की फ्लाइट्स में भारी देरी से यात्री परेशान, दुबई जाने वाली उड़ानें घंटों लेट

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 पर यात्रियों ने दुबई जाने वाली स्पाइसजेट की उड़ानों में भारी देरी के कारण विरोध प्रदर्शन किया। इस घटना से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
* स्पाइसजेट की एक उड़ान 30 घंटे और दूसरी उड़ान 19 घंटे की देरी से रवाना हुई।
* एयरलाइन ने परिचालन संबंधी समस्याओं और विमानों के ग्राउंड होने को देरी का कारण बताया।
* इसी दौरान दिल्ली में कई स्कूलों और अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल मिले।
* पुलिस और बम निरोधक दस्तों ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली।
स्पाइसजेट यात्रियों का विरोध प्रदर्शन
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 पर यात्रियों ने दुबई जाने वाली स्पाइसजेट की उड़ानों में महत्वपूर्ण देरी के बाद विरोध प्रदर्शन किया। एक उड़ान में 30 घंटे की देरी हुई, जबकि दूसरी सेवा को 19 घंटे की देरी का सामना करना पड़ा। स्पाइसजेट ने इन व्यवधानों के लिए परिचालन संबंधी चुनौतियों और विमानों के ग्राउंड होने को जिम्मेदार ठहराया। एयरलाइन ने बयान में कहा कि उसने प्रभावित यात्रियों को सहायता प्रदान की और बैकलॉग को प्रबंधित करने के लिए वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था की।
दिल्ली में बम की झूठी धमकियां
इन व्यवधानों के दौरान, दिल्ली में विभिन्न सुरक्षा चेतावनियों के बाद हाई अलर्ट जारी रहा। 15 सितंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे से 10:45 बजे के बीच द ब्रिटिश स्कूल, सरदार पटेल विद्यालय, संस्कृति स्कूल, स्प्रिंगडेल्स स्कूल, एयर फोर्स बाल भारती स्कूल और कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल सहित कई संस्थानों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली। इन ईमेल में 'खालिस्तान' का हवाला देने वाली धमकियां और 29 सितंबर तक मेट्रो या ट्रेन सेवाओं का उपयोग करने के खिलाफ चेतावनियां शामिल थीं। इन ईमेल में तीस हजारी, कड़कड़डूमा और पटियाला हाउस अदालतों को भी निशाना बनाया गया।
पुलिस जांच और वीपीएन का इस्तेमाल
दिल्ली पुलिस ने बम निरोधक दस्तों और अग्निशामक सेवाओं के साथ मिलकर तोड़फोड़ विरोधी जांच की और पुष्टि की कि कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांचकर्ता वर्तमान में इन ईमेल भेजने वालों का पता लगा रहे हैं, जिन पर अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का उपयोग करने का संदेह है। यह घटना 14 सितंबर 2026 को अदालतों और सीआरपीएफ स्कूलों के खिलाफ धमकियों की एक पिछली लहर के बाद हुई, जिसके लिए गुजरात पुलिस पहले ही दो संदिग्धों को पकड़ चुकी है।