स्पाइसजेट को झटका: 50 करोड़ रुपये जमा न करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की समय विस्तार की याचिका

एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ाई दिखाते हुए कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने कलानिधि मरण और KAL एयरवेज को बकाया राशि चुकाने के लिए और समय मांगा था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कंपनी अपने खुद के वादे पूरे नहीं कर सकती, तो उसे बार-बार समय की मोहलत नहीं दी जा सकती।
पूरा मामला 144.51 करोड़ रुपये के विवाद से जुड़ा है। जस्टिस विनोद कुमार की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर स्पाइसजेट ने तय समय सीमा के भीतर 50 करोड़ रुपये की पहली किस्त जमा कर दी होती, तो शायद कोर्ट दूसरी किस्त के समय को लेकर थोड़ा उदार रुख अपना सकता था। लेकिन कंपनी ने अपने वादे के मुताबिक 45 दिनों के भीतर यह रकम जमा नहीं की, जिसके चलते कोर्ट ने अब और समय देने से इनकार कर दिया है।
संपत्ति को सिक्योरिटी बनाने का प्रस्ताव भी नामंजूर
पैसे जमा करने में असमर्थता के बीच स्पाइसजेट ने गुरुग्राम स्थित अपनी एक प्रॉपर्टी के दस्तावेज सिक्योरिटी के तौर पर देने की पेशकश की थी। हालांकि, अदालत ने इस प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया। कोर्ट ने याद दिलाया कि इससे पहले फरवरी 2026 में भी ऐसा ही प्रस्ताव आया था, जिसे इसलिए खारिज किया गया था क्योंकि वह प्रॉपर्टी गिरवी थी। भले ही अब कंपनी का दावा है कि प्रॉपर्टी पर कोई बोझ नहीं है, लेकिन कोर्ट का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि एयरलाइन ने 50 करोड़ रुपये जमा करने के अपने लिखित आश्वासन का पालन नहीं किया।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद स्पाइसजेट और उसके एमडी अजय सिंह ने हाई कोर्ट से समय मांगा था। 13 जुलाई को कोर्ट ने उनकी बात मानकर 45 दिनों में 50 करोड़ और फिर 90 दिनों में बाकी रकम जमा करने का निर्देश दिया था। लेकिन अगस्त में जब कंपनी ने फिर से समय विस्तार की अर्जी लगाई, तो कोर्ट ने उसे स्वीकार नहीं किया और KAL एयरवेज व कलानिधि मरण को कानूनन उचित कार्रवाई करने की छूट दे दी।