साउथ डिस्ट्रिक्ट पुलिस की पहल: 'जन सुनवाई' से दूर होंगी आम जनता की शिकायतें

दिल्ली की साउथ डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने आम नागरिकों की समस्याओं को सुनने और उनका त्वरित समाधान करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। पुलिस प्रशासन ने 'जन सुनवाई' पहल के जरिए यह साफ कर दिया है कि अब जनता की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। 'आपकी आवाज मायने रखती है, आपकी चिंताएं मायने रखती हैं' के नारे के साथ शुरू की गई इस मुहिम का मकसद पुलिसिंग में पारदर्शिता लाना और नागरिकों के बीच भरोसे को मजबूत करना है।
यह पूरी व्यवस्था दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा द्वारा जून 2026 में जारी दिशा-निर्देशों और उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू के निर्देशों के बाद लागू की गई है। इस प्रोग्राम के तहत राजधानी के सभी पुलिस थानों में हर शनिवार सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक 'थाना दिवस-जन सुनवाई' का आयोजन किया जा रहा है।
शिकायतों का डिजिटल ट्रैकिंग और अधिकारियों की जवाबदेही
जन सुनवाई के दौरान आने वाली हर शिकायत को दर्ज किया जाएगा, चाहे वह पहले से डिजिटल सिस्टम (ICMS) पर दर्ज हो या नहीं। सभी शिकायतों को डिजिटल ट्रैकिंग पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा ताकि उनकी निगरानी की जा सके। इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए स्पेशल, जॉइंट, एडिशनल, डिप्टी और असिस्टेंट कमिश्नर जैसे वरिष्ठ अधिकारी बारी-बारी से इन सुनवाई सत्रों में शामिल हो रहे हैं।
थानों के SHO को निर्देश दिए गए हैं कि वे जनता के लिए एक मित्रवत माहौल तैयार करें, जिसमें हेल्प डेस्क और बैठने की उचित व्यवस्था शामिल हो। साथ ही, DCP स्तर के अधिकारियों को सोशल मीडिया, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और बीट स्टाफ के माध्यम से लोगों को इस पहल के बारे में जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस पूरी व्यवस्था में जवाबदेही को सबसे ऊपर रखा गया है। शिकायतों के निपटारे के लिए SHO, ACP और जिला DCP व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। हर दूसरे सोमवार को विजिलेंस डिवीजन और रेंज ऑफिसर को एक रिपोर्ट भेजनी होगी, जिसमें यह बताना होगा कि कितनी शिकायतें मिलीं, कितनी हल हुईं और कितनी अभी लंबित हैं। अगर किसी अधिकारी ने जनता की समस्याओं को हल करने में लापरवाही बरती, तो विभागीय स्तर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।