दक्षिण दिल्ली के मुनिरका इलाके में एक 78 वर्षीय रिटायर्ड आर्मी मैन और उनकी पत्नी के साथ 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर 15.5 लाख रुपये की बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। यह पूरी घटना 17 अप्रैल 2026 की है जब बदमाशों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर इस वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों ने अपनी पहचान 'डीसीपी अनिल कुमार' और 'एसआई विजय' के रूप में बताई और बुजुर्ग दंपति को जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी। स्कैमर्स ने बुजुर्ग जोड़े को 48 घंटे तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और दावा किया कि उनके पैसे को बेकसूर साबित करने के लिए 'RBI वेरिफिकेशन' की जरूरत है, जिसके बाद डर के मारे पीड़ित ने अपनी जीवनभर की जमापूंजी ट्रांसफर कर दी।
द इंडियन एक्सप्रेस की 24 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, नरेश गोयल के नाम का इस्तेमाल करके साइबर फ्रॉड करने का यह एक बड़ा पैटर्न है। नरेश गोयल को मूल रूप से सितंबर 2023 में कैनरा बैंक में कथित 538 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किया गया था (स्रोत:
NewsOnAir), हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने बाद में सितंबर 2025 में उनके खाते को 'फ्रॉड' के रूप में वर्गीकृत करने को रद्द कर दिया था। इस तरह के मिलते-जुल्ते घोटालों के कारण देश भर में लोगों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, जिसमें मार्च 2026 में कर्नाटक में 15 करोड़ रुपये, फरवरी 2026 में पुणे में 10.7 करोड़ रुपये और जुलाई 2026 में बेंगलुरु में 20.6 लाख रुपये की ठगी शामिल है।
दिल्ली की लोकल पुलिस ने मुनिरका मामले में अपनी जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश जारी है। इस बीच, देश की अन्य एजेंसियां भी इन साइबर सिंडिकेट्स पर लगातार शिकंजा कस रही हैं। 24 अगस्त 2026 को गोवा साइबर क्राइम पुलिस ने इसी तरह के 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम से जुड़े केरल के एक निवासी को गिरफ्तार किया है, जो पीड़ितों को डराने के लिए नरेश गोयल के मामले और फर्जी गिरफ्तारी वारंट का इस्तेमाल करता था।