सोनिया और राहुल गांधी का दिल्ली हाईकोर्ट में दावा, नेशनल हेराल्ड केस में ED की कार्रवाई अवैध

Kittu Kumari22 September 20263 min read0 viewsNational
सोनिया और राहुल गांधी का दिल्ली हाईकोर्ट में दावा, नेशनल हेराल्ड केस में ED की कार्रवाई अवैध

नई दिल्ली। सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) का मनी लॉन्ड्रिंग का मामला टिक नहीं सकता है। उनका तर्क है कि यह मामला पुलिस जांच पर नहीं, बल्कि एक निजी नागरिक की शिकायत पर आधारित है और PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम) इसे वैध आधार नहीं मानता है। दोनों नेताओं ने 18 सितंबर 2026 को अलग-अलग लेकिन लगभग एक जैसे जवाब दाखिल किए। इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को तय की गई है।

निजी शिकायत और कानून का सवाल

डJवाब में कहा गया है कि PMLA में 'प्राइवेट शिकायत' (private complaint) शब्द कहीं नहीं है। उनका कहना है कि यह देश का एकमात्र ऐसा मामला है जहां ईडी ने किसी निजी नागरिक की शिकायत पर कार्रवाई की है। यह शिकायत साल 2013 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दर्ज कराई थी। गांधी परिवार का कहना है कि ईडी इस कमी को दूर करने के लिए "खुद से गढ़ी गई कानूनी दलीलों" का सहारा ले रहा है। उन्होंने मजिस्ट्रेट के संज्ञान आदेश को एफआईआर से बड़ा बताने वाली ईडी की दलील को "सुविधा की दलील" बताया है। जवाब में PMLA की धारा 5(1) पर जोर दिया गया है, जो ईडी को केवल दो स्थितियों में कार्रवाई करने की अनुमति देती है। पहली, धारा 173 सीआरपीसी के तहत दायर पुलिस की अंतिम रिपोर्ट, और दूसरी, अपराध की जांच के लिए अधिकृत अधिकारी द्वारा दायर शिकायत। गांधी परिवार का तर्क है कि स्वामी की शिकायत इन दोनों कसौटियों पर खरी नहीं उतरती है। एक निजी शिकायतकर्ता जांच नहीं कर सकता है और मजिस्ट्रेट की पूछताछ की शक्तियां भी सीमित होती हैं। जवाब में यह भी जोड़ा गया है कि स्वामी लगभग एक दशक तक अदालत में सबूत पेश करने में विफल रहे, जो यह साबित करता है कि निजी शिकायत कितनी अविश्वसनीय है।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ईडी का पुराना रुख

गांधी परिवार ने सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले (विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ) का हवाला दिया है। उनका तर्क है कि इसके अनुसार किसी भी PMLA कार्रवाई के लिए अनुसूचित अपराध का पंजीकरण पूर्व शर्त है। उनका कहना है कि ईडी ने उस फैसले से 'प्राइवेट शिकायत' शब्दों को संदर्भ से बाहर निकालकर इस्तेमाल किया है। जवाब में ईडी के अपने पिछले आचरण की ओर इशारा किया गया है। इसमें जनवरी 2015 और अगस्त 2015 के तकनीकी सर्कुलर, 2013 में केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष दिए गए प्रस्तुतिकरण और 2024 के एक आरटीआई (RTI) जवाब का हवाला दिया गया है। इन सभी में ईडी ने खुद कहा था कि PMLA के तहत कार्रवाई करने से पहले एफआईआर जरूरी है। इस मामले में ECIR (ईसीआईआर) केवल जून 2021 में यानी स्वामी की शिकायत के सात साल बाद दर्ज की गई थी। इसे सितंबर 2025 में अदालत के आदेश के बाद ही ट्रायल कोर्ट को दिखाया गया था। जवाब में 3 अक्टूबर 2025 को दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) द्वारा दर्ज एक नई एफआईआर का भी जिक्र है, लेकिन ईडी ने खुद ट्रायल कोर्ट से कहा था कि वह उस एफआईआर पर भी भरोसा नहीं कर रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि और अन्य आरोपी

दोनों गांधी चाहते हैं कि हाईकोर्ट ईडी की रिवीजन याचिका को खारिज कर दे। उन्होंने इसे "कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग" बताया है। इस मामले की शुरुआत स्वामी की 2013 की शिकायत से हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कांग्रेस नेताओं ने नेशनल हेराल्ड अखबार के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को हासिल करने के लिए साजिश रची थी। इन संपत्तियों की कीमत 2,000 करोड़ रुपये से अधिक थी और यंग इंडियन (Young Indian) के माध्यम से इसके लिए 50 लाख रुपये चुकाए गए थे। सोनिया और राहुल गांधी यंग इंडियन में बहुसंख्यक शेयरधारक हैं। ईडी ने अप्रैल 2025 में अपनी PMLA शिकायत दर्ज की थी, जिसे एक विशेष न्यायाधीश ने दिसंबर 2025 में खारिज कर दिया था। इसके अगले ही दिन ईडी ने हाईकोर्ट का रुख किया। इस मामले में अन्य आरोपी पक्षों में सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डॉटएक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

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