तंदूरी चिकन का वो पहला स्वाद और साड़ी का सफर, सोनिया गांधी की किताब 'Belonging' में खुला दिल का हाल
सोनिया गांधी की आने वाली किताब 'Belonging' में उन्होंने राजीव गांधी के साथ तंदूरी चिकन के पहले स्वाद और भारतीय संस्कृति को अपनाने के सफर का जिक्र किया है।

इतालवी गलियों से निकलकर भारत की राजनीति के शिखर तक पहुंचने वाली सोनिया गांधी अब अपनी जिंदगी के अनकहे पहलुओं को दुनिया के सामने लाने जा रही हैं। उनकी आने वाली संस्मरण किताब 'Belonging: A Journey of Love' में उन्होंने उन छोटी-छोटी लेकिन बेहद निजी यादों को संजोया है, जिन्होंने उन्हें एक विदेशी नागरिक से इस देश की बेटी बनाने में मदद की। इस किताब में खाने और पहनावे के जरिए उनके भारत के साथ जुड़ाव की एक बेहद दिलचस्प कहानी सामने आई है।
सोनिया गांधी ने अपनी किताब में जिक्र किया है कि भारतीय व्यंजनों के साथ उनका सफर काफी रोमांचक रहा। उन्होंने याद किया कि राजीव गांधी के साथ उन्होंने सबसे पहले तंदूरी चिकन चखा था। उस अनुभव को याद करते हुए वह लिखती हैं कि वह डिश गहरे लाल रंग की थी, थोड़ी जली हुई थी और उसने उनके मुंह में आग लगा दी थी। हालांकि, समय के साथ यह अनजाना स्वाद उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया। धीरे-धीरे वह थाली में परोसे जाने वाले चावल, फुल्के, सब्जियां और मटन-मछली की शौकीन हो गईं, लेकिन एक चीज जो उनके रोज के खाने का हिस्सा बनी, वह थी 'अरहर दाल'।
साड़ी का चुनाव और नेहरू जी का ऐतिहासिक जुड़ाव
सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि भारतीय पहनावे के प्रति उनका लगाव भी इस किताब का मुख्य हिस्सा है। सोनिया गांधी बताती हैं कि वह साड़ी को दुनिया के सबसे शानदार परिधानों में से एक मानती थीं, लेकिन इसे पहनना एक अलग चुनौती थी। उन्होंने अपनी सगाई के समय जेड ग्रीन और हल्के पीले रंग की ड्रेस चुनी थी, जिसे उन्होंने कई सेफ्टी पिन्स की मदद से संभाल कर रखा था। लेकिन उनकी शादी की साड़ी का महत्व कुछ और ही था; उसका सूत खुद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आजादी की लड़ाई के दौरान जेल में काता था।
यह किताब केवल खान-पान और कपड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्यार, नुकसान और सार्वजनिक जिम्मेदारी के बीच झूलती एक जीवन यात्रा है। इसमें 1965 में कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से उनकी पहली मुलाकात, 1968 में उनकी शादी और फिर इंदिरा गांधी व राजीव गांधी की हत्या जैसे गहरे जख्मों का भी जिक्र है।
HarperCollins India द्वारा प्रकाशित यह किताब 10 नवंबर 2026 को रिलीज होगी, जो पाठकों को सोनिया गांधी की सार्वजनिक छवि से परे उनके व्यक्तिगत संघर्षों और भारत के प्रति उनके गहरे लगाव से रूबरू कराएगी।