सोनिया गांधी के खिलाफ वोटर लिस्ट मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट करेगा फिर से सुनवाई

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की मुश्किलें एक बार फिर कानूनी मोड़ ले सकती हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट अब उस शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई करेगी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि भारतीय नागरिक बनने से पहले ही उनका नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था। इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को तय की गई है।
पूरा मामला 1980 के दशक का है। शिकायतकर्ता वकील विकास त्रिपाठी का आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में वोटर लिस्ट में जोड़ दिया गया था, जबकि वह अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिक बनी थीं। नियमों के मुताबिक, मतदाता सूची में केवल भारतीय नागरिकों का ही नाम हो सकता है। दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया गया है कि उनका नाम 1980 में जोड़ा गया, 1982 में हटाया गया और फिर 1983 में दोबारा शामिल किया गया।
सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को क्यों पलटा?
इससे पहले, एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) ने सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने से इनकार कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए विकास त्रिपाठी ने सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। स्पेशल जज विशाल गोगने ने निचली अदालत के उस आदेश को 'नॉन-स्पीकिंग ऑर्डर' (बिना ठोस तर्क वाला आदेश) बताते हुए खारिज कर दिया।
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि केवल इस आधार पर शिकायत को खारिज नहीं किया जा सकता कि रिकॉर्ड की फोटोकॉपी असत्यापित थी। सेशन कोर्ट ने यह भी माना कि नागरिकता और वोटर लिस्ट जैसे गंभीर मुद्दे पर निचली अदालत की टिप्पणियां अनुचित थीं और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कोई संज्ञेय अपराध हुआ है या नहीं।
अब प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज ने इस मामले को दोबारा ACJM विनोद जोशी की अदालत में भेज दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि संबंधित पुलिस अधिकारी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी जाए और सभी पक्षों को सुनने के बाद एक विस्तृत और तर्कपूर्ण आदेश पारित किया जाए।