टाटा ग्रुप पर राहुल गांधी के बयान से भड़कीं निर्मला सीतारमण, कहा- व्यावसायिक मुद्दों का राजनीतिकरण बंद करें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा ग्रुप पर टिप्पणी करने पर राहुल गांधी को फटकारा और व्यावसायिक मामलों के राजनीतिकरण का आरोप लगाया।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsNational
टाटा ग्रुप पर राहुल गांधी के बयान से भड़कीं निर्मला सीतारमण, कहा- व्यावसायिक मुद्दों का राजनीतिकरण बंद करें

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच टाटा ग्रुप को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। सीतारमण ने राहुल गांधी पर व्यावसायिक और कानूनी मामलों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयानों से भारतीय व्यापारिक दिग्गजों और सरकार के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे हर मुद्दे पर राजनीति करना बंद करें। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि व्यावसायिक और कानूनी विवादों को 'आपराधिक मामला' बताना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। वित्त मंत्री ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी बार-बार भारतीय उद्योगों और उद्यमियों की सफलता पर सवाल क्यों उठाते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता व्यापारिक जगत को सरकार के खिलाफ भड़काने और माहौल को जहरीला बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

लाइसेंस राज और आर्थिक विरासत पर हमला

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सीतारमण ने कांग्रेस की आर्थिक नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा कि दशकों तक 'लाइसेंस-कोटा राज' के जरिए भारतीय उद्यमियों की भावना को कुचला गया, जिससे करोड़ों भारतीय गरीबी के जाल में फंसे रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियां उद्योगों को समर्थन देने, निवेश को बढ़ावा देने और उद्यमशीलता को सक्षम बनाने पर केंद्रित हैं। साथ ही, उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका का सम्मान करने और संस्थानों पर बेबुनियाद आरोप लगाने से बचने की अपील की।

दूसरी ओर, राहुल गांधी ने इस मामले को और गरमा दिया। उन्होंने वित्त मंत्री के 'व्यावसायिक मामले' वाले तर्क पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किस कानूनी या कमर्शियल काम के लिए टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के प्रतिनिधियों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर बुलाया गया था? राहुल गांधी ने सरकार पर कुछ खास बिजनेस ग्रुप्स को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए इसे 'क्रोनी कैपिटलिज्म' से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि देश के अधिकांश व्यवसायी सरकार के तौर पर नाखुश हैं और उन्हें भड़काने की जरूरत नहीं है।

यह पूरा विवाद टाटा ग्रुप के भीतर एन चंद्रशेखरन की टाटा संस के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पुनर्नियुक्ति को लेकर चल रहे आंतरिक विवाद के बीच शुरू हुआ है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस पुनर्नियुक्ति के बोर्ड प्रस्ताव की वैधता पर सवाल उठाए थे। हालांकि, इस आंतरिक खींचतान के बावजूद टाटा ग्रुप की कंपनियों का प्रदर्शन शानदार रहा है। टीसीएस (TCS) के शुद्ध लाभ में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, वहीं टाटा मोटर्स ने भी पिछले साल के नुकसान के मुकाबले इस तिमाही में मुनाफा दर्ज किया है।

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