सिरसा में सीजन का पहला पराली जलाने का मामला दर्ज, हरियाणा सरकार ने कसी कमर

हरियाणा के सिरसा जिले में इस सीजन का पहला पराली जलाने का मामला सामने आया है, जिसके बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। जिले के बरगुढ़ा पुलिस स्टेशन ने रघुआना गांव के एक किसान चंद्रपाल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई पर्यावरण अधिकारी हरि प्रसाद की औपचारिक शिकायत के बाद की गई है। जांच में पाया गया कि 16 अक्टूबर को ओढ़ा ब्लॉक में कृषि भूमि को जलाया गया था, जिसके बाद पुलिस ने पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत केस दर्ज कर लिया है।
ड्रोन से निगरानी और 'रेड एंट्री' का डर
पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने इस बार तीन स्तरों वाला सख्त एक्शन प्लान तैयार किया है। अब केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि दोषी किसानों की जमीन के रिकॉर्ड में 'रेड कैटेगरी' (लाल प्रविष्टि) दर्ज की जाएगी। अगर किसी किसान के खेत में ऐसी एंट्री हो जाती है, तो उसे 15 महीनों तक सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने और औपचारिक माध्यमों से फसल बेचने में दिक्कत आ सकती है। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 30,000 रुपये तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
प्रशासन ने निगरानी के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर 'स्टबल प्रोटेक्शन फोर्स' तैनात की है, जो ड्रोन सर्वे और नाइट पेट्रोलिंग के जरिए खेतों पर नजर रख रही है। वहीं, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने भी हरियाणा के 16 जिलों में फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए हैं।
दूसरी तरफ, सरकार उन किसानों को प्रोत्साहित भी कर रही है जो पराली नहीं जला रहे हैं। कृषि विभाग अब फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 1,000 रुपये के बजाय 1,200 रुपये प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता दे रहा है। नोडल अधिकारी सचिन कंबोज ने किसानों से अपील की है कि वे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और रोटावेटर जैसी मशीनों का उपयोग करें, जो कस्टम हायरिंग सेंटर्स पर उपलब्ध हैं।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस साल एल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण मौसम के पैटर्न में बदलाव हो सकता है, जिससे बारिश कम होगी और हवा में प्रदूषक तत्व ज्यादा समय तक टिके रहेंगे। ऐसे में हवा की गुणवत्ता और खराब होने का खतरा है, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार भी भूमि रिकॉर्ड में पराली जलाने की घटनाओं को दर्ज करने के नए नियमों पर विचार कर रही है।