1984 सिख विरोधी दंगे: पीड़ितों ने बयां किया दर्द, कांग्रेस पर लगाया साजिश का आरोप
दिल्ली के गुरुद्वारे में जुटे 1984 दंगों के पीड़ितों ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और इंसाफ की मांग की।

दिल्ली के तिलक विहार स्थित गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब में आयोजित एक तीन दिवसीय स्मृति कार्यक्रम के दौरान 1984 के सिख विरोधी दंगों की शिकार महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाई। इन महिलाओं ने उन खौफनाक यादों को ताजा किया जब उनके अपनों को बेरहमी से मारा गया और उनके घरों को आग के हवाले कर दिया गया। पीड़ितों का कहना है कि 1984 सिख विरोधी दंगे महज एक दंगा नहीं था, बल्कि मासूम सिखों पर किया गया एक सुनियोजित हमला था।
कार्यक्रम में माता भागी कौर, कुलजीत कौर, गंगा कौर, अतर कौर, लक्ष्मी कौर, ठकरी कौर, प्रीति सिंह, जसवीर कौर, परमजीत कौर और मनप्रीत कौर जैसी सर्वाइवर्स ने हिस्सा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार की नाक के नीचे दंगाइयों ने आतंक मचाया और उन्हें राजनीतिक संरक्षण दिया गया। महिलाओं ने कहा कि उस दौर की सरकार ने हिंसा को रोकने के बजाय उसे बढ़ावा दिया, जिससे हजारों परिवार तबाह हो गए और वे आज भी उस गहरे मानसिक सदमे से उबर नहीं पाए हैं।
लोकतंत्र की बात करने वाली कांग्रेस दे जवाब: पीड़ित
पीड़ित महिलाओं ने वर्तमान राजनीतिक माहौल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज कांग्रेस नेता लोकतंत्र, संविधान और मानवाधिकारों की बातें करते हैं, लेकिन उन्हें पहले 1984 में सिख समुदाय के साथ हुए अन्याय का जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व ने प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अब तक क्या किया है और क्यों इन परिवारों को सालों तक इंसाफ के लिए संघर्ष करना पड़ा।
इस मौके पर जोन अध्यक्ष हरीश ओबेरॉय और पश्चिम दिल्ली जिला महासचिव सरदार चरण जीत सिंह लवली ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इससे पहले रविवार को दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने भी गुरुद्वारे का दौरा कर पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की थी। अंत में, पीड़ितों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी को केवल औपचारिक संवेदनाएं व्यक्त करने के बजाय पीड़ित परिवारों से तहे दिल से माफी मांगनी चाहिए।