गुरुग्राम: श्री दुर्गा रामलीला में राम जन्म की लीला, अयोध्या जैसा सजा माहौल

गुरुग्राम के जैकबपुरा में आयोजित 61वें श्री दुर्गा रामलीला महोत्सव के दूसरे दिन जब मंच पर भगवान श्रीराम के जन्म का दृश्य आया, तो पूरा परिसर भक्ति के रंग में डूब गया। राम जन्म की इस लीला ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं को इतना भावविभोर कर दिया कि ऐसा महसूस होने लगा जैसे पूरा माहौल अयोध्या नगरी में बदल गया हो। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भजनों की लहर और बधाइयों के बीच लोग नाचते-गाते नजर आए।
लीला की शुरुआत में दिखाया गया कि कैसे राक्षसों के बढ़ते अत्याचार से धरती और देवता त्रस्त थे। इस संकट से मुक्ति पाने के लिए देवताओं ने भगवान विष्णु की आराधना की और उनसे पृथ्वी पर अवतार लेकर अधर्म का विनाश करने की प्रार्थना की। इसके बाद कहानी राजा दशरथ के दरबार पहुंची, जहां संतान सुख न मिलने के कारण राजा बेहद चिंतित थे। अपनी इसी व्यथा को लेकर वे गुरु वशिष्ठ के आश्रम पहुंचे, जिन्होंने उन्हें पुत्रेष्टि यज्ञ करने की सलाह दी।
वैदिक मंत्रोच्चार और शिव की मनोहारी लीला
यज्ञ के दृश्य को बेहद जीवंत बनाने के लिए शृंगेरी शारदा पीठ वेद पाठशाला के विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रों का सस्वर उच्चारण किया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया। यज्ञ के बाद प्राप्त खीर का सेवन करने पर राजा दशरथ की तीनों रानियों ने चार राजकुमारों—राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को जन्म दिया।
इस आयोजन का सबसे खास आकर्षण वह पल था जब भगवान शिव ने मदारी का रूप धारण कर अयोध्या की धरती पर कदम रखा। अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के बाल स्वरूप के दर्शन के लिए मदारी के वेश में आए शिव की इस लीला ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद मंच पर ताड़का वध का प्रसंग दिखाया गया, जिसमें श्रीराम ने ऋषियों-मुनियों को राक्षसों के आतंक से मुक्ति दिलाई। सुबाहु और मारीच से जुड़े दृश्यों ने कहानी में रोमांच भर दिया और दर्शकों को धर्म की जीत का संदेश दिया।