Shraddha Walkar Murder Case: Delhi High Court का बड़ा आदेश, MHA और MEA को 4 विदेश गवाहों को पेश कराने के निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को श्रद्धा वॉकर मर्डर केस में सुनवाई करते हुए एक बड़ा आदेश जारी किया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई तय समय में पूरा करने के लिए कोई नया निर्देश देने से इनकार कर दिया है, क्योंकि ट्रायल कोर्ट पहले से ही रोज़ाना के आधार पर कार्यवाही कर रहा है और केस में तेजी लाने के लिए पूरा प्रयास कर रहा है। इसके साथ ही, जस्टिस मधु जैन ने Ministry of Home Affairs (MHA) और Ministry of External Affairs (MEA) को निर्देश दिया है कि वे उन 4 विदेशी गवाहों की पेशी सुनिश्चित करने के प्रयास करें, जिनकी गवाही ट्रायल कोर्ट में अभी दर्ज होनी बाकी है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए ANINews पर रिपोर्ट देखें।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने श्रद्धा वॉकर मर्डर केस में समयबद्ध सुनवाई की मांग वाली याचिका पर दिया फैसला।
- MHA और MEA को 4 विदेशी गवाहों की पेशी के लिए प्रयास करने का निर्देश।
- ट्रायल कोर्ट पहले से ही रोज़ाना (day-to-day) कर रहा है मामले की सुनवाई।
- चार्जशीट में शामिल 222 गवाहों में से 157 से पूछताछ पूरी हो चुकी है।
याचिकाकर्ता की मांग और परिवार की दलीलें
यह फैसला मृतका श्रद्धा वॉकर के भाई श्रीजय विकास वॉकर द्वारा दायर की गई एक याचिका के जवाब में आया है, जिसमें ट्रायल को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने की मांग की गई थी। याचिका में इस बात पर जोर दिया गया था कि लंबी देरी के कारण परिवार को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है और वे श्रद्धा वॉकर का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनके अवशेष अभी भी केस प्रॉपर्टी का हिस्सा हैं। याचिका में ट्रायल में हो रही लंबी देरी का मुद्दा उठाया गया था।
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दी जानकारी
दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अमित प्रसाद और स्पेशल पब्लिक Prosecutor मधुकर् पांडे ने कोर्ट को बताया कि चार्जशीट में कुल 222 prosecution गवाहों का जिक्र किया गया था, जिनमें से 157 से पूछताछ की जा चुकी है। अभी 6 गवाहों से पूछताछ होना बाकी है और 14 गवाहों की cross-examination होना शेष है। इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़े 4 विदेशी गवाहों की गवाही भी अभी दर्ज होनी बाकी है। पुलिस ने यह भी बताया कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी आफताब अमीन पूनावाला को पहले ही नोटिस दे दिया है ताकि यदि उसके वकील अनुपस्थित हों, तो रोज़ाना होने वाली सुनवाई में कोई रुकावट न आए और उचित व्यवस्था की जा सके।