श्रद्धा वाल्कर मर्डर केस: व्हाट्सएप और गूगल के विदेशी अधिकारियों की वीडियो गवाही को कोर्ट की मंजूरी

दिल्ली की एक अदालत ने श्रद्धा वाल्कर हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने व्हाट्सएप, गूगल और बंबल जैसे बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स के नोडल अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी गवाही दर्ज कराने की अनुमति दे दी है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि ये गवाह अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम (UK) में रहते हैं और उनका शारीरिक रूप से कोर्ट पहुंचना मुश्किल और खर्चीला होता।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) हरगुरविंदर सिंह जग्गी ने 10 अक्टूबर, 2026 को यह आदेश जारी किया। अदालत ने माना कि यदि इन अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से बुलाया जाता है, तो इसमें भारी खर्च आएगा और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होगी। मामले की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए वर्चुअल गवाही को जरूरी माना गया है।
1 दिसंबर से शुरू होगी गवाही की प्रक्रिया
अदालत के आदेश के मुताबिक, गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया 1 दिसंबर, 2026 से शुरू होगी, जिसमें हर दिन एक गवाह से पूछताछ की जाएगी। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित अधिकारियों की गवाही शामिल है:
- एड्रियन सिल्वेरा: व्हाट्सएप एलएलसी और मेटा प्लेटफॉर्म्स (कैलिफोर्निया)
- शेल्बी स्मिथ: गूगल एलएलसी (टेक्सास)
- आरती शेठ: गूगल जीमेल (कैलिफोर्निया)
- ल्यूक मित्सि: बंबल ग्रुप (लंदन)
यह पूरी प्रक्रिया सीआरपीसी की धारा 296 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के कानूनी प्रावधानों के तहत पूरी की जाएगी। गवाही के लिए साकेत कोर्ट कॉम्प्लेक्स में 'कोर्ट पॉइंट' और संबंधित देशों में भारतीय दूतावास या उच्चायोग में 'रिमोट पॉइंट' बनाया जाएगा, जहाँ भारतीय मिशन का एक अधिकारी पूरी कार्यवाही की निगरानी करेगा।
कोर्ट ने इस आदेश की कॉपी विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और संबंधित राजनयिक मिशनों को भेजने का निर्देश दिया है ताकि समय पर समन्वय हो सके। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर राम सिंह को इस पूरी प्रक्रिया के लिए संपर्क अधिकारी नियुक्त किया गया है। मुख्य आरोपी आफताब अमीन पूनावाला के खिलाफ चल रहा यह ट्रायल अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है।